पद के अनुरूप आचरण हो तो सबको अच्छा लगता है
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: हर क्षेत्र में कई बार ऐसा होता है कि किसी को किसी भी कारण से पद तो बड़ा मिल जाता है लेकिन पद मिलने के बाद सबको पता चलता है कि फलाने आदमी का कद तो इस पद के लायक नहीं है। पद तो बड़ा मिल गया है लेकिन आदमी बड़े पद के लायक नहीं है। पद तो आदमी को बड़ा मिल गया है लेकिन उसका आचरण बड़े पद के अनुरूप नहीं है।जब किसी आदमी का आचरण उसके पद के अऩुरूप नहीं होता है तो उसके आचरण की आलोचना ही की जा सकती है। चार में से एक शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की इन दिनों खूब चर्चा है और आलोचना की जा रही है तो इसलिए भी की जा रही है कि उनका आचरण उनके पद के अनुरूप नहीं माना जा रहा है।
देश में होने को चार शंकराचार्य हैं। तीन शंकराचार्य का आचरण उनके पद के अनुरूप होता है, वह शांत, विनम्र रहते हैं, उनकी खबरों में बनी रहने की चाह नहीं रहती है, इसलिए उनको लेकर कभी कोई विवाद नहीं होता है,उनकी आलोचना उनके किसी आचरण को लेकर नहीं होती है। चौथे शंकराचार्य अक्सर अपने आचार व विचार के कारण आए दिन चर्चा मे रहते है, उनके आचरण के लिए उनकी आलोचना संत समाज भी करता है और सामान्य लोग भी करते हैं। इस बार शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इसलिए चर्चा में है और उनकी आलोचना इसलिए की जा रही है कि माघ मेला में स्नान के लिए उऩको पालकी पर जाने से रोक दिया गया।
बस प्रशासन की इस कार्रवाई पर कि आपने हमें स्नान करने से कैसे रोका, शंकराचार्य ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया। धरने पर बैठ गए।धरने पर बैठना किसी शंकराचार्य को शोभा नहीं देता है। यह समझने का प्रयास नहीं करना कि प्रशासन ने उनको स्नान करने से नहीं रोका, बस यह कहा कि स्नान करने पालकी पर न जाए, पैदल जाएं, शंकराचार्य थोड़ी दूर पैदल चलकर स्नान कर सकते थे,कोई विवाद नहीं होता। प्रशासन ने शंकराचार्य से पैदल जाकर स्नान करने को इसलिए कहा कि भीड़ बहुत है,भीड़ की व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी थी, प्रशासन तो अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था,बस उसी को शंकराचार्य ने अपना अपमान समझ लिया।उनके आचरण, उनके बयानों को देखते हुए तो लोगों को लगता है कि वह माघ मेला में स्नान करने नहीं विवाद के लिए ही आए थे। माघ मेला में विवाद हुआ गैर भाजपा दलों को राजनीति करने का मौका मिल गया है।
शंकराचार्य को धरना नहीं देना था, धरना स्थल पर कांग्रेस नेताओं को नहीं बुलाना था, उनके धरना स्थल पर कांग्रेस नेता आए उन्होंने जो कहा उससे साफ हो गया है कि यह सब इसलिए किया गया है कि शंकराचार्य के अपमान के नाम पर योगी सरकार,मोदी सरकार को सनातन विरोधी बताया जा सके। देश में प्रचार किया जा सके कि योगी सरकार व मोदी सरकार सनातन समर्थक नहीं सनातन विरोधी है।कांग्रेस ने तो कई जगह माघ मेला में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से दुर्व्यवहार,मारपीट को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है ताकि वह भाजपा सरकारों को सनातन विरोधी व खुद का सनातनी साबित कर सके। हकीकत यह है कि कांग्रेस हिंदू विरोधी मानी जाती है, इसलिए मौका मिलता है तो खुद को हिंदू समर्थक साबित करने का प्रयास करती है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के आचरण की संत समाज ने भी आलोचना की है।जगद्गुरू रामभ्रद्राचार्य ने शंकराचार्य से जुड़े विवाद पर कहा है कि शंकराचार्य के साथ कोई अऩ्याय नहीं हुआ है बल्कि शंकराचार्य ने खुद नियमों का उल्लंघन किया है।रामभद्राचार्य का कहना है कि धार्मिक परंपराओं व नियमों का पालन सबको करना चाहिए।रामभ्रदाचार्य का कहना सही है कि कहीं पर व्यवस्था के लिए नियम बनाया गया है तो सबको उस नियम का पालन करना चाहिए ताकि व्यवस्था बनी रहे। जैसे देश का कानून सबके लिए समान होता है वैसे ही व्यवस्था के लिए बनाए गए नियम भी सबके लिए बराबर होते हैं,कोई इस नियम से बड़ा नहीं होता है।
