एआई अब दूरसंचार के भविष्य के साथ वर्तमान की जरूरत भी: ट्राई

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) और भारतीय सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क (एसटीपीआई) द्वारा बुधवार को आयोजित सम्मेलन में बताया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से ग्राहक अनुभव बेहतर हो रहा है और पारदर्शिता व उपभोक्ता विश्वास बनाए रखने के लिए जिम्मेदार एआई ढांचे की जरूरत है।
केंद्रीय संचार मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम में ट्राई अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी, सदस्य ऋतु रंजन मित्तर और डॉ. एमपी तंगिराला, सचिव अतुल कुमार चौधरी, एसटीपीआई महानिदेशक अरविंद कुमार तथा आईआईटी गांधीनगर निदेशक प्रो. राजत मूना मौजूद रहे।
एसटीपीआई महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि पहले नेटवर्क को केवल पाइप कहा जाता था, लेकिन अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वजह से यह “बुद्धिमान पाइप” बन गया है। ट्राई सचिव अतुल कुमार चौधरी ने कहा कि एआई से सेवा की गुणवत्ता बेहतर होगी और इसके लिए उचित नियम कानून आवश्यक हैं।
ट्राई अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य की बात नहीं है बल्कि दूरसंचार का आधार बन चुकी है। नेटवर्क स्वचालन से लेकर स्पैम कॉल रोकने तक, एआई पहले ही सेवाओं को बदल रहा है। इसका प्रयोग पारदर्शी, जिम्मेदार और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए ताकि उपभोक्ता का विश्वास बना रहे।
कार्यक्रम में इस बात पर सहमति बनी कि दूरसंचार क्षेत्र में तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग को देखते हुए इसके लिए सुरक्षित तैनाती, स्वदेशी शोध और क्षमता निर्माण पर ध्यान देना होगा।
तकनीकी चर्चाओं में बताया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से नेटवर्क की देखभाल, यातायात प्रबंधन और गड़बड़ी पहचान आसान हो रही है। विशेषज्ञों ने कहा कि 5जी और फाइबर नेटवर्क में एआई की मदद से कंपनियां अब केवल प्रतिक्रिया देने वाली नहीं बल्कि भविष्यवाणी करने वाली और स्वयं सुधार करने वाली प्रणालियां बना रही हैं।
एक अन्य सत्र में जिम्मेदार एआई पर विचार हुआ जिसमें बताया गया कि एआई आधारित विश्लेषण और सुझाव इंजन से ग्राहकों को बेहतर योजनाएं, स्मार्ट डेटा पैक और लक्षित प्रस्ताव दिए जा रहे हैं। साथ ही स्पैम कॉल रोकने, अनचाहे संदेश छांटने और सुरक्षित सामग्री उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।

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