दिल्ली विधानसभा ने पंजाब के एफएसएल डायरेक्टर को भेजा नोटिस

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी से जुड़े वीडियो मामले में पंजाब फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) के डायरेक्टर को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा आतिशी को कथित विशेषाधिकार उल्लंघन के संबंध में भी नोटिस जारी किया गया है और उनसे 19 जनवरी तक लिखित जवाब देने का अनुरोध किया गया है।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को अपने आवास पर पत्रकार वार्ता में कहा, विधानसभा सचिवालय द्वारा आज पंजाब एफएसएल के डायरेक्टर को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें रिपोर्ट के आधार सहित विस्तृत उत्तर मांगा गया है। इसके लिए उन्हें 22 जनवरी तक का समय दिया गया है। इस मामले की विधिक प्रक्रिया में दिल्ली विधानसभा सदन किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता, दिल्ली विधानसभा की गरिमा तथा लोकतांत्रिक जवाबदेही को बनाए रखने की आवश्यकता को देखते हुए सदन का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है, क्योंकि इस विषय में सभी निर्णय केवल सदन द्वारा ही लिए जाने चाहिए, कहीं और नहीं। गुप्ता ने कहा कि यह विषय सिख गुरु तेग बहादुर जी से संबंधित संदर्भों से जुड़ा है, जिनका सर्वोच्च बलिदान अंतरात्मा, साहस और आस्था की रक्षा का शाश्वत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरुओं के चरणों में शीश झुकाना सौभाग्य और श्रद्धा का विषय है, जो भारत की सभ्यतागत और नैतिक परंपरा में गहराई से निहित है। उन्होंने कहा कि जिनमें संवेदना, भावना और श्रद्धा का अभाव होता है, वे ही इस सत्य को गरिमा के साथ स्वीकार नहीं कर पाते। गुप्ता ने यह भी रेखांकित किया कि विपक्ष के नेता तथा सदन के नेता, दोनों ही जनता की संवैधानिक आवाज हैं और उन पर सार्वजनिक भावना तथा विधानसभा के माध्यम से व्यक्त जन-आकांक्षाओं का सम्मान करने की समान जिम्मेदारी है। विधानसभा अध्यक्ष गुप्ता ने बताया कि तथ्यों के पूर्ण सत्यापन को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी किए गए हैं। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तथा जालंधर के पुलिस आयुक्त से उत्तर प्राप्त हुए हैं। डीजीपी को व्यक्तिगत कारणों से 22 जनवरी 2026 तक उत्तर प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया है। जालंधर के पुलिस आयुक्त को वीवीआईपी दौरे से संबंधित आधिकारिक व्यस्तताओं के कारण समय प्रदान किया गया है।
फॉरेंसिक परीक्षण के संबंध में अध्यक्ष ने बताया कि पंजाब के विशेष पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) द्वारा एक लिखित उत्तर प्रस्तुत किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि साइबर अपराध शाखा की इस घटना में कोई परिचालन या जांच संबंधी भूमिका नहीं है। यह उत्तर वर्तमान में विस्तृत जांच का विषय है तथा स्थिति को और स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा जा सकता है, ताकि किसी भी प्रकार की अस्पष्टता न रहे और सत्य पूर्ण रूप से अभिलेख पर स्थापित हो सके।
गुप्ता ने बताया कि दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने इस मामले में कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। विपक्ष की नेता आतिशी को कथित विशेषाधिकार उल्लंघन के संबंध में नोटिस जारी किया गया है और उनसे 19 जनवरी 2026 तक लिखित उत्तर प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया है। गुप्ता ने स्पष्ट किया कि विशेषाधिकार समिति को संदर्भ सदन के पटल पर ही भेजा गया था तथा आगे की सभी कार्यवाहियां, जिनमें वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजना भी शामिल है, सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के समर्थन से ही की गयी हैं।
इस घटना की पृष्ठभूमि का जिक्र कर विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि यह मुद्दा छह जनवरी को सदन की कार्यवाही के दौरान उठा, जिसके कारण विधायी कार्य में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई। सात जनवरी को कार्यवाही का प्रतिलेख शब्दशः सदन में पढ़कर सुनाया गया। विपक्ष की नेता आतिशी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने या सदन के समक्ष खेद व्यक्त करने के लिए बार-बार अवसर दिए गए, किंतु कोई स्पष्टीकरण अभिलेख पर नहीं रखा गया। इसके परिणामस्वरूप सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई थी।

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