वर्तमान चुनौतियों पर ही नहीं, भविष्य के युद्धों की भी है तैयारी : सेना प्रमुख द्विवेदी

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जयपुर{ गहरी खोज }: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को जयपुर में कहा कि भारतीय सेना को भविष्य के लिए ऐसी हथियार प्रणालियां और उपकरण चाहिए, जो भारत में ही डिजाइन और विकसित किये गए हों। सेना भविष्य के लिए तैयार बल के रुप में आगे बढ़ रही है।
सेना दिवस परेड में आए सेना प्रमुख गुरुवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे। सेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी आक्रमण का जवाब देने के लिए भारतीय सेना हर समय तैयार है। इसके लिए सेना आधुनिकतम तकनीक का उपयोग कर रही है। जैसे-जैसे तकनीक में बदलाव आता रहेगा, सेना स्वयं को तकनीकी रुप से अपडेट करती रहेगी। उन्होंने भारतीय सेना के वीर सैनिकों को नमन करते हुए कहा कि सैनिकों ने देश सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया है।
सेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई की क्षमता को दर्शाया है। यह एक परिपक्व, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बल की तस्वीर प्रस्तुत करता है। जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में स्पष्ट बदलाव आया है। हम केवल वर्तमान चुनौतियों पर ही नहीं, भविष्य के युद्धों की तैयारी में भी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इसी दिशा में भविष्य की आवश्यकतानुसार ट्रेंड किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के अंतर्गत नई इकाईयां खड़ी की गयी है। जिसे आज परेड के दौरान देखा गया है।
सेना प्रमुख ने कहा कि आज हम किसी युद्ध की लंबाई के बारे में नहीं बता सकते हैं। आपरेशन सिंदूर चार दिन चला तो यूक्रेन रुस युद्ध चार साल से चल रहा है। ऐसे में अगर देश को लंबी लड़ाई लड़नी है तो सेना का साजो-सामान देश में ही बनना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उसकी रिपेयरिंग भी भारत में ही होनी चाहिए। यूक्रेन और रूस युद्ध से हमें कुछ सीखना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज की लड़ाइयों में छोटी टुकड़ियां बड़ी टुकडिय़ों के मुकाबले ज्यादा प्रभावी साबित हो रही हैं। पहले से बनी यूनिट्स में बदलाव की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी होती है, जबकि नई बनाई गई यूनिट्स तेजी से बदलाव अपना लेती हैं। इसी सोच के तहत भैरव बटालियन को खड़ा किया गया है, जो सामान्य इन्फेंट्री और स्पेशल फोर्स के बीच के गैप को कवर करती है। परेड में भैरव बटालियन ने जिस तरह अपनी क्षमता दिखाई है, उसे देखते हुए अगर ऐसी 25 बटालियन खड़ी कर दी जाएं, तो पारंपरिक इन्फेंट्री की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
जनरल द्विवेदी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में साफ बदलाव आया है। सेना अब सिर्फ मौजूदा चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रही है। इसी दिशा में नए स्ट्रक्चर्स तैयार किए जा रहे हैं और उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार ट्रेन्‍ड किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के तहत भैरव बटालियन, अग्नि प्लाटून्स, शक्ति बाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं, जिनकी झलक आर्मी डे परेड में देखने को मिली। उन्होंने बताया कि ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक रिस्पॉन्सिव और मिशन ओरिएंटेड सेना के निर्माण को दिखाती हैं।
उन्होंने युद्ध में तकनीक के इस्तेमाल को रेखांकित करते हुए कहा कि आज ड्रोन 400 मीटर से 800 किलोमीटर तक जाने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि आईडीईएक्स और ‘अदिति’ स्कीम जैसी योजनाओं के जरिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है और जब नया इक्विपमेंट सेना की जरूरतों पर खरा उतरता है तो उसके ऑर्डर चार से छह गुना तक बढ़ाए जा सकते हैं, जिसे नई डिफेंस प्रोसीजर में और आगे बढ़ाने की तैयारी है।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि आज की परेड परंपरा और परिवर्तन का सुंदर संगम देखने को मिला है। बैंडवादन ने भारत-नेपाल के प्रगाढ़ सम्बन्धों को दिखाया है। जयपुर में देखने को यही मिला कि जनता और सेना के बीच गहरा संबंध है।

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