जड़ों से जुड़े लोग अपनी भाषा में बात करते हैं: ओम बिड़ला

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नई दिल्ली { गहरी खोज }: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने रविवार को कहा कि जो जड़ों से जुड़े रहते हैं, वो भारत की मिट्टी से जुड़े होते हैं और अपनी भाषा में बात करते हैं। ओम बिड़ला ने यह बात आज दिल्ली स्थित इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के समापन सत्र में कही। मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने कहा, हमारा प्रयास है कि वैश्विक मंचों पर भी भारतीय भाषाओं में अपनी बात को रखा जाए। बिड़ला ने भाषा के प्रसार में हिन्दी फिल्मों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि इनकी वजह से भारतीय भाषाएं दुनिया भर में पहुंची हैं।
यह सम्मेलन विचारों को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि वर्तमान पीढ़ी को दुनिया की सबसे समृद्ध भाषाओं से कैसे जोड़ा जाए, जिनके हर शब्द में भारत की संस्कृति बसती है।
​लोकसभा अध्यक्ष ने प्रवासी भारतीयों की आने वाली पीढ़ियों को भारतीय भाषाएँ सिखाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, ताकि वे अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहें। ​उन्होंने आग्रह किया कि आगामी बजट सत्र में अधिक से अधिक सांसद अपनी भाषा में बात रखें, जिससे लोकतंत्र के मंदिर से भारतीय भाषाओं का विस्तार हो।
​सत्र की अध्यक्षता कर रहे आईजीएनसीए के अध्यक्ष एवं पद्म भूषण से सम्मानित प्रख्यात चिंतक राम बहादुर राय ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस आयोजन ने साबित किया है कि भारतीय भाषाओं की एक वैश्विक परिधि है और हिन्दी ही इस परिधि का केंद्र है।
राय ने लोकसभा अध्यक्ष की उपस्थिति में भारत सरकार से दो प्रमुख आग्रह किए कि ​प्रत्येक मंत्रालय में आठवीं अनुसूची की सभी 22 भारतीय भाषाओं के अनुवादक नियुक्त किए जाएं। इसके अलावा, भारत सरकार एक संस्थान बनाए जो भाषा की समायोजना, योजना और समस्याओं को हल करने के लिए विशेषज्ञों को स्थान दे।
यह सम्मेलन “भाषाएं, साहित्य, युवा और प्रौद्योगिकी” विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें भारत एवं विदेशों से आए प्रतिष्ठित विद्वानों, लेखकों, भाषाविदों और सांस्कृतिक चिंतकों ने भाग लिया।
समारोह में विशिष्ट अतिथियों में दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, प्रो. रमेश सी. गौर, डीन (प्रशासन), आईजीएनसीए; अनिल जोशी, अध्यक्ष वैश्विक हिंदी परिवार एवं निदेशक अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन; प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी, डीन, भारतीय भाषाएं विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय; श्याम परांडे, महासचिव, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद; ए. विनोद, संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास; तथा विनयशील चतुर्वेदी, निदेशक, वैश्विक हिंदी परिवार शामिल रहे। तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान आयोजित 40 सत्रों, पुस्तक एवं कला प्रदर्शनी, फिल्म प्रदर्शन, नाट्य प्रस्तुति और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए।

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