यह तो जिसकी लाठी उसकी भैस का मामला हो गया
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: विश्व में कई देश हैं, विश्व में एक व्यवस्था बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीूय कानून है, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हैं। हर देश की अपनी सीमा है,अपनी सरकार है, अपनी संप्रभुता है, अपनी सेना है। वहां की जनता ही चुनाव के जरिए तय कर सकती है कि यहां सरकार किसकी होगी। कई देशों में चुनी हुईं सरकारें नहीं है,तानाशाही है तो भी उस देश पर किसी को सेना भेज कर कोई कब्जा नहीं कर सकता क्योंकि इसे गलत माना जाता है। इसे गलत न माना जाए तो होगा क्या हर बड़ा देश छोटे देश में सेना भेजकर कब्जा कर सकता है। ऐसे में होगा यही कि जिसके पास लाठी होगी वही भैंस का मालिक हो जाएगा। ट्रंप ने वेनेजुएला में सेना भेजकर वहां के राष्ट्रपति उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमरीका लाने को कह दिया और अमरीकी सेना ने ऐसा कर भी दिया है। इससे विश्व के तमाम देशों में संदेश यही गया है कि अमरीका का कहना मानना होगा नहीं मानने पर वेनेजुएला जैसा हाल हो सकता है।
अमरीका अपने को लोकतांत्रिक देश कहता है, एक लोकतांत्रिक देश का राष्ट्रपति ऐसा अलोकतांत्रिक काम कैसे कर सकता है। वह अपने देश का कानून से दूसरे देश के राष्ट्रपति व उनकी पत्तनी को गिरफ्तार करने का आदेश कैसे दे सकता है। अमरीका राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसा किया है और बहाने से किया है। बहाना क्या है। बहाना यह है कि वेनेजुएला का राष्ट्रपति अमरीका में मादक पदार्थों की तस्करी करवाते है, अमरीका के खिलाफ साजिश करते हैं।वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो कई महीनों से ट्रंप के निशाने पर थे, क्योंकि ट्रंप चाहते थे वह उनका कहना माने, ट्रंप चाहते थे कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति को जिन्हें मादुरो जेल में डाल दिया है, जेल से रिहा कर दें।मादुरो ने ऐसा नहीं किया।वह अमरीका विरोधी है, उन्होंने अमरीका समर्थक राष्ट्रपति को सत्ता से हटाकर एक गलती की थी और दूसरी गलती यह की कि अमरीकी समर्थक राष्ट्रपति को जेल में डाल दिया।
एक लोकतांत्रिक देश के अलोकतांत्रित राष्ट्रपति ही अलोकतांत्रिक काम का शानदार काम कहकर उसकी तारीफ कर सकता है। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सेना के मादुरो व उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमरीका लाने को शानदार काम कहा है और यह भी साफ कर दिया है कि अमरीका विरोधी मादुरों से जुड़े लोगों को वह सत्ता नहीं सौंपेंगे और वेनेजुएला में उचित व्यवस्था होने तक अमरीका वहां खुद शासन करेगा।उन्होने दक्षिण अमरीकी देश वेनेजुएला के तेल भंडारों पर नियंत्रण का ऐलान किया है। सच्चाई यही है कि वेनेजुएला विश्व के ऐसे देशो में से एक हां जहां गैस व तेल के बड़े भंडार है और अमरीका यहां अपना नियंत्रण चाहता था, मादुरों उनकी बात मान नही रहे थे इसलिए वेनेजुएला पर नियंत्रण के लिए अमरीका ने बहाने से आखिर मादुरों को गिरफ्तार कर अमरीका मंगवा लिया है और एक बार फिर से अपनी शक्ति का बेहूदा प्रदर्शन कर यही साबित किया है कि वह विश्व में मनमानी कर सकता है और उसे कोई रोक नहीं सकता।
वेनेजुएला पर अमरीका के हमले व कब्जे की रूस चीन व ईरान सहित कई देशों ने विरोध किया है।रुस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियो में तनाव काे आगे बढ़ने से रोकना और संवाद के जरिए हालात को हाथ से बाहर न निकलने देने का रास्ता खोजना होगा।रूस ने मादुरो को गिरप्तार करने की निंदा की है। यूरोपीय देशों ने हालत पर नजर रखने की बात कही है यानी अमरीका का खुला विरोध नही किया है। कुछ देशों को छोड़कर किसी देश ने अमरीका सैन्य कार्रवाई का विरोध नहीं किया है।अमरीका के भीतर भी ट्रंप के इस कदम का विरोध हो रहा है।रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने इस हमले पर ही सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि बिना युध्द की औपचारिक घोषणा या कांग्रेस की बिना अनुमति की गई यह कार्रवाई संवैधानिक रूप से गलत है। बताया जाता है कि ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई से पहले सैन्य मामलो की अधिकार प्राप्त समिति को इस आपरेशन की पूर्व सूचना देन थी पर नहीं दी।
अमरीका व चीन अब तक दूसरे देशों में अपनी कठपुतली सरकार बनाने का नेता स्थापित करने दूसरे तरीकों का प्रयोग करते रहे हैं जैसे आंदोलनों के जरिए किसी सरकार इस्तीफा देने के लिए मजबूर करना उसके बात वहां पर अपना समर्थक नेता स्थापित करना।अमरीका व चीन के कारण ही भारत के कई पड़ोसी देशों में पिछले साल कई सरकारों को इस्तीफा देना पड़ा।आंदोलन के जरिए मोदी सरकार को मुश्किल डालने की कोशिश की गई। बांग्लादेश में पीएम ने अमरीका का कहना नहीं माना तो वहां आंदोलन के जरिए पीएम को इस्तीफा देने विवश कर दिया गया। नेपाल, बांग्लादेश,श्रीलंका में भी यही सब अमरीका व चीन ने किया था। इन घटनाओं से साफ है कि किसी भी देश को राष्ट्रीय सुरक्षा व संप्रभुता के लिए केवल अंतर्राष्ट्रीय कानूनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, वैश्विक राजनीति में शक्ति ही सत्य है। जिसकी लाठी उसकी भैस है,यही सच है। बडी मछली छोटी मछली को कभी खा सकती है,वह समझती है कि यह उसका अधिकार है।विश्व के छोटे देशों को एकजुट होकर अमरीका काे यह बताने की जरूरत है कि उसने गलत किया है,वह सब इसका विरोध करते हैं।
