जिले में शीतलहर का प्रकोप, दोपहर बाद हुए सूर्य भगवान के दर्शन

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अनूपपुर{ गहरी खोज }: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में पिछले तीन दिनों से कड़ाके पूरे शबाब पर है.ठंड के साथ घने कोहरे के आगोश में लिपटा हुआ हैं। जिले में सोमवार की सुबह से ही कोहरा छाया रहा। इधर, अमरकंटक में ओस की बूंदे जमने से मानो पूरा मैदानी क्षेत्र सफेद चादर से ढका हो। उत्तर से आ रही हवा से जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कोहरे के कारण विजिबिलिटी 200 मीटर से कम थी। इस दौरान हालात ऐसे रहे कि वाहन चालकों को दिन में भी लाइट ऑन कर वाहन चलाने पड़े। जहां दोपहर बाद सूर्य भगवान के दर्शन हो सकें। वहीं अनूपपुर में रात का पारा 6.8 डिग्री के आसपास रहा। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले तीन दिनों के भीतर न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है। इससे रात और सुबह के समय ठंड का असर बढ़ेगा।
मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ नगरी अमरकंटक सहित पूरे पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में शीतलहर का प्रकोप देखने को मिल रहा है। प्रकृति ने आज एक बार फिर मैदानों पर सफेद चादर ओढ़ा दी है। चार दिनों के अंतराल के सोमवार की सुबह ओस की शबनमी बूंदें बर्फ में तब्दील हो गईं और यत्र-तत्र-सर्वत्र बर्फ ही बर्फ नजर आने लगी। घास-फूस, पत्तियां, छानी-छप्पर, तिरपाल, टीन की छतें तथा चौपहिया वाहनों की छत और कांच पर बर्फ की मोटी परत जम गई। मौसम के जानकारों के अनुसार आज तापमान पुनः न्यूनतम स्तर पर रहा। जबकि बीते चार दिनों तक तापमान 12 से 13 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।
जिले में नववर्ष के बाद लगातार तीन दिनों तक आसमान में घने और गहरे काले बादल छाए रहने से ठंड से कुछ राहत मिली थी, लेकिन जैसे ही बादल छटे, ठंड ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया। इसका परिणाम यह रहा कि एक बार फिर अमरकंटक में बर्फ जम गई और पूरा क्षेत्र सफेद चादर में ढक गया, जो ठंड की तीव्रता को बयां कर रही थी। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। बड़ी संख्या में पर्यटक, तीर्थ यात्री एवं श्रद्धालु ठंड की परवाह किए बिना मां नर्मदा के पावन जल में डुबकी लगा रहे। वहीं यह जमी बर्फ, ठंडी हवाएं और प्राकृतिक सौंदर्य से सजी पवित्र नगरी अमरकंटक इन दिनों पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। जो भी यहां पहुंच रहा है, वह इस अनोखी ठंड और प्रकृति की सफेद चादर का अद्भुत नजारा देख अभिभूत हो रहा है।
कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के ज्यादा मामले सामने आ रहें हैं। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है। नवजातों की मांसपेशियां कम विकसित होती हैं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और बढ़ जाता है।

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