पुतिन के आवास पर हमले की खबर से मोदी चिंतित, शांति के लिए कूटनीति पर जोर
नई दिल्ली{ गहरी खोज }: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास को निशाना बनाए जाने की खबरों पर गहरी चिंता जताई है। रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि दुश्मनी खत्म करने और स्थायी शांति हासिल करने का सबसे प्रभावी रास्ता राजनयिक प्रयास ही हैं। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे कूटनीतिक कोशिशों पर ध्यान केंद्रित करें और ऐसे किसी भी कदम से बचें जो शांति प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, “रूसी महासंघ के राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाने की खबरों से हम बहुत चिंतित हैं। चल रही राजनयिक कोशिशें दुश्मनी खत्म करने और शांति हासिल करने का सबसे अच्छा रास्ता हैं। हम सभी संबंधित पक्षों से आग्रह करते हैं कि ऐसे किसी भी काम से बचें जो इन्हें कमजोर कर सकता है।”
इससे पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावारोव ने दावा किया कि यूक्रेन ने बीती रात राष्ट्रपति पुतिन के आवास पर 91 लंबी दूरी के ड्रोन से हमला किया। यह आवास रूस के उत्तर-पश्चिमी नोवोग्रोड क्षेत्र में स्थित बताया गया है। लावारोव के अनुसार, रूस की वायु रक्षा प्रणाली ने सभी ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।
हालांकि, यूक्रेन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ऐसे आरोप लगाकर शांति वार्ता को पटरी से उतारना चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह यूक्रेन पर हमले जारी रखने का बहाना है और रूस पहले भी कीव में सरकारी इमारतों को निशाना बनाता रहा है। रूसी राष्ट्रपति के आवास पर कथित हमले के बाद रूस ने संकेत दिए हैं कि वह शांति समझौते को लेकर अपनी स्थिति की दोबारा समीक्षा करेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमले के समय राष्ट्रपति पुतिन उस आवास में मौजूद थे या नहीं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिका के फ्लोरिडा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच संशोधित शांति प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। बैठक के बाद जेलेंस्की ने कहा था कि 2026 में युद्ध थमने की संभावना बन सकती है, हालांकि इसके लिए अमेरिकी समर्थन जरूरी होगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े ताजा घटनाक्रमों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की अपील को वैश्विक स्तर पर शांति और कूटनीति की दिशा में एक अहम संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
