मतदाता सूची शुध्दीकरण में सभी का सहयोग जरूरी है

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }
: देश में लोकतंत्र है और लाेकतंत्र तब ही मजबूत होता है जब देश में समय पर शुध्द मतदाता सूची के आधार पर निष्पक्ष व स्वतंत्र चुनाव हों। चुनाव में ज्यादा से ज्यादा से लोग वोट डालें और अपना जनप्रतिनिधि चुनें. किसी एक राजनीतिक दल को बहुमत मिले और वह सरकार बनाए। एसआईआर तय समय में मतदाता सूची शुध्दीकरण का काम है। यह काम चुनाव आयोग का है। देश में एसआईआर २००३ में हुआ था उसके बाद नहीं हुआ था, यानी मतदाता सूची शुध्दीकरण का काम बरसों के बाद हुआ है और यह इसलिए किया गया कि देश के राजनीतिक दलों ने कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव होने के बाद आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में कई तरह की त्रुटियां है। इससे चुनाव में गड़बड़ी का अंदेशा व्यक्त किया गया। कांग्रेस व राहुल गांधी ने तो यह आरोप लगाया कि चुनाव में चुनाव आयोग ने मिलीभगत कर भाजपा को कई राज्यों में जिताया है। यानी भाजपा कई राज्यों में जीती है तो वह वोट चोरी केे कारण जीती है।
बिहार चुनाव के पहले कांग्रेस व राहुल गांधी ने इस तरह के आरोप लगाए थे, इसलिए बिहार चुनाव कराने के पहले बिहार में मतदाता सूची शुध्दीकरण का काम पूरी गंभीरता से चुनाव आयोग ने कराया। एसआईआर को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी गए राजनीतिक दल लेकिन यह चुनाव आयोग का काम था,इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक नहीं लगाई।बिहार में शुध्द मतदाता सूची के आधार पर चुनाव हुआ और भाजपा नीतीश कुमार को चुनाव में बंपर जीत मिली। आरोप लगाने वाला आरोप लगाते रहे लेकिन अब तक तो कोई यह साबित नहीं कर सका है कि बिहार चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है। बिहार के चुनाव के बाद अगले एक दो साल में कई राज्यों में चुनाव होने है, इसलिए चुनाव ने १२ राज्यों में एक साथ एसआईआर कराने का फैसला किया और मतदाता सूची के दूसरे चरण के एसआईआर में चुनाव आयोग ने तीन राज्यों मप्र,छत्तीसगढ़, केरल व केंद्र शासित अंडमान और निकोबार की मतदाताओं की मसौदा सूची जारी कर दी है।
चुनाव आयोग ने अपना एक काम पूरी ईमानदारी के कर दिया है।अब मसोदा सूची में अगर कोई त्रुटि है तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी आम लोगों सहित सभी राजनीतिक दलों की है। चुनाव आयोग ने अपनी तरफ से बता दिया है कि मतदाता सूची से उन लोगों के नाम हटा दिए गए हैं जिनकी मृत्यु हो गई है, जिनके नाम दो जगह थे, जो दूसरे राज्य चले गए हैं,तीनों राज्यों में कुल ९५ लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कटें हैं।इनमें सबसे अधिक ४२.७४ लाख मप्र से कटे हैं।छत्तीसगढ़ में कुल २.१२ करोड़ मतदाताओं में से तीन प्रतिशत मृत,९ प्रतिशत स्थानांतरित,एक प्रतिशत दोहरे मतदाता पाए गए हैं।इसी तरह चुनाव न मप्र व केरल का बता दिया है कि यहां कितने लोगों के नाम कटे हैं।आयोग ने मसौदा सूची को राजनीतिक दलों के भी सौंपा है ताकि उनको कहीं कोई त्रुटि सुधारना हो तो वह चुनाव आयोग को त्रुटि बताकर सुधरवा सकें।चुनाव आयोग के अनुसार जो मतदाता प्रारंभिक सूची में हटाए गए हैं,वे पात्र है तो अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार अगर किसी का नाम मसौदा सूची में नहीं है और पात्र मतदाता है तो उसके पास २२ जनवरी तक नाम जुड़वाने का मौका है।चुनाव आयोग ने इसके लिए दावा आपत्ति करने के लिए २२ जनवरी तक का समय दिया है।सत्यापन व सुनवाई १४ फरवरी तक होगी।उसके बाद अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसमें वे लोग भी नाम जुड़वा सकते हैं जो जनवरी २६ या उसके पहले १८ साल के हो गए हैं। राजनीतिक दल भले ही चुनाव आयोग पर कई तरह के आरोप लगाते रहे लेकिन आयोग ने साफ कर दिया है कि एसआईआर का मकसद किसी पात्र व्यक्ति को वोट देने से रोकना नहीं है।बल्कि मतदाता सूची को शुध्द करना है यानी सूची में पात्र लोगों के नाम हों। जिन लोगों के नाम किसी कारण से मसौदा सूची में नहीं है, वह अपना नाम खुद जुड़वा सकते हैं।राजनीतिक दल चाहे तो वह भी इस बात की शिकायत चुनाव आयोग से कर सकते हैं कि उनके क्षेत्र के इन पात्र लोगों का नाम सूची में नहीं है।चुनाव आयोग ने अपना काम कर दिया है अब पात्र लोगों व राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वह भी मतदाता सूची को शुध्द करने में जो भी सहयोग कर सकते हैं करना चाहिए। इससे चुनाव और ज्यादा निष्पक्ष व स्वतंत्र होंगे।

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