बीते आठ वर्षों में काशी में पहली बार मुख्यमंत्री की जनसुनवाई,लेकिन जनता रही दरवाजे पर :कांग्रेस

0
images

वाराणसी{ गहरी खोज }: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में शनिवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार सर्किट हाउस में जनसुनवाई की। इसको लेकर कांग्रेस ने तंज कसा है। पार्टी के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने बीते 8 वर्षों में पहली बार जनसुनवाई करने का दावा किया। लेकिन तस्वीरें और ज़मीनी हकीकत ने सरकार की सच्चाई खोल दी। विभागीय फ़ोटो साफ़ दिखा रहे हैं कि मुख्यमंत्री के सामने केवल भाजपा के चुनिंदा पदाधिकारी बैठे थे। असली फरियादी—गाँव-गाँव और मोहल्लों से अपनी समस्या लेकर आए लेकिन इनको सर्किट हाउस के गेट पर ही रोक दिया गया।
महानगर अध्यक्ष ने कहा कि सर्किट हाउस के बाहर खड़ी जनता घंटों इंतज़ार करती रही, ठोकरें खाती रही, लेकिन मुख्यमंत्री तक उनकी आवाज़ नहीं पहुंची। 08 साल का इंतज़ार और खोखला प्रोपेगंडा साबित हुआ है। सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री लगभग हर महीने काशी आते हैं, तब जनता से सीधा संवाद करने में 8 साल क्यों लग गए? । और जब जनसुनवाई हुई भी तो आमजन को भीतर क्यों नहीं आने दिया गया?। क्या भाजपा सरकार जनसमस्याओं से भाग रही है?आज वाराणसी भ्रष्टाचार, अपराध, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य व शिक्षा संकट और अव्यवस्था की भेंट चढ़ चुकी है। गंगा घाटों पर सौंदर्यीकरण की चमक के पीछे मोहल्लों में टूटी सड़कों, गड्ढों और जलभराव का अंधेरा छिपा है। विकास के नाम पर हो रहे प्रोजेक्ट दरअसल विनाश का रूप ले चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 8 साल बाद पहली बार जनसुनवाई करने का दिखावा किया है,यह जनसुनवाई महज़ प्रोपेगंडा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *