ऋषि पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र, उद्यापन विधि, कथा और महत्व सबकुछ यहां जानें

0
rishi-panchami-1756346916

धर्म { गहरी खोज } :ऋषि पंचमी हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और सप्त ऋषियों की पूजा करने से सारे पापों से छुटकारा मिल जाता है। ये व्रत महिला-पुरुष दोनों रख सकते हैं। लेकिन विशेष रूप से ये व्रत रजस्वला दोष से शुद्ध होने हेतु स्त्रियों द्वारा रखा जाता है। इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व होता है। यहां हम आपको बताएंगे ऋषि पंचमी की पूजा विधि और मुहूर्त के बारे में।

ऋषि पंचमी पूजा मुहूर्त 2025

ऋषि पञ्चमी – 28 अगस्त 2025, गुरुवार
ऋषि पञ्चमी पूजा मुहूर्त – 11:05 ए एम से 01:39 पी एम
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ – 27 अगस्त 2025 को 03:44 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त – 28 अगस्त 2025 को 05:56 पी एम बजे

ऋषि पंचमी पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हो सके तो इस दिन गंगा स्नान करें। इसके बाद घर में पूजा स्थल पर लकड़ी की चौकी रखें और उस पर सप्त ऋषियों की स्थापना करें। इसके बाद गंध, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से सप्तर्षियों की विधि विधान पूजा अर्चना करनी चाहिए। सप्तर्षियों फूल माला व फूल अर्पित करें। उन्हें यग्योपवीत (जनेऊ) पहनाएं और सफेद वस्त्र अर्पित करें। फिर फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं। इसके बाद नीचे दिए गये मंत्र का जाप करते हुए उन्हें अर्घ्य दें:

ऋषि पंचमी मंत्र

कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥
दहन्तु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः’॥

इस मंत्र से अर्घ्य देने के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा सुनें और अंत में आरती करें। इस दिन फलाहार खाकर उपवास रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

ऋषि पंचमी का उद्यापन कब करें

स्त्रियों को माहवारी का समय समाप्त होने पर अर्थात वृद्धावस्था के बाद ऋषि पंचमी व्रत का उद्यापन करना चाहिए। ऋषि पंचमी उद्यापन में ऊपर दी गई पूजा विधि के अनुसार पूजा करें। उसके बाद सात ब्रह्मणों को सप्त ऋषि का रूप मानकर उन्हें भोजन खिलाएं व अपने इच्छानुसार दान करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *