हिमाचल की पशु मित्र योजना

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संपादकीय { गहरी खोज }: हिमाचल प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगार और पशुपालन विभाग को मजबूती देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में अब मल्टी टास्क वर्कर को पशु मित्र नाम से जोड़ा जाएगा। सरकार की अधिसूचना के अनुसार राज्यभर के पशु चिकित्सालयों, औषधालयों, पॉलीक्लिनिक, भेड़-बकरी और गौशालाओं, पोल्ट्री फार्मों और प्रयोगशालाओं में स्थानीय युवाओं को पशु मित्र के रूप में रखा जाएगा। प्रत्येक पशु मित्र को 5 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलेगा और उनसे केवल चार घंटे प्रतिदिन काम लिया जाएगा। इस पद के लिए उम्मीदवार हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए। आयु 18 से 45 वर्ष और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास निर्धारित की गई है। अच्छे चरित्र, शारीरिक रूप से स्वस्थ और पशुपालन से जुड़ा ज्ञान रखने वालों को प्राथमिकता मिलेगी। अधिसूचना में कहा गया है कि पशु मित्रों का काम पशुओं को पकड़ने व संभालने, इलाज और टीकाकरण में मदद करने, चारा-पानी पहुंचाने, दवाइयों व उपकरणों की देखभाल करने, अस्पताल और फार्मों की सफाई करने तथा मृत पशुओं का निपटान करने का होगा। पशु मित्रों को सालाना 12 दिन की छुट्टी, रविवार और राजपत्रित अवकाश मिलेंगे। महिला कर्मचारियों को दो बच्चों तक 180 दिन मातृत्व अवकाश और गर्भपात की स्थिति में 45 दिन की छुट्टी मिलेगी। लगातार सात दिन बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर सेवा स्वतः समाप्त हो जाएगी। कर्मचारी चाहें तो एक महीने का नोटिस देकर नौकरी छोड़ सकते हैं। वहीं, अनुशासनहीनता, असंतोषजनक काम या स्वास्थ्य कारणों पर विभाग सेवा समाप्त कर सकता है। हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 500 पशु मित्रों की भर्ती को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम से जहां युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं पशुपालन विभाग को गांव-गांव तक मजबूती मिलेगी।
पशु मित्रों का चयन दो चरणों में होगा। पहले चरण में शारीरिक परीक्षा देनी होगी। इसमें उम्मीदवार को 25 किलो वजन उठाकर 100 मीटर दूरी एक मिनट में पूरी करनी होगी। यह परीक्षा इसलिए रखी गई है क्योंकि पशु मित्रों को बड़े पशुओं को पकड़ने-संभालने, बीमार नवजात पशुओं को उठाने, मृत पशुओं का निपटान करने और भारी चारे की बोरियां या तरल नाइट्रोजन कंटेनर उठाने जैसे काम करने होंगे। शारीरिक परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को मेरिट के आधार पर काउंसलिंग के लिए बुलाया जाएगा। चयन उपमंडल स्तर पर गठित समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता एसडीएम करेंगे।
हिमाचल सरकार की पशु मित्र योजना प्रदेश की आर्थिक व सामाजिक स्थितियों को देखते हुए उचित दिशा में उठा कदम ही माना जाएगा। पहाड़ी क्षेत्र में पशुओं की देखरेख करने में अधेड़ आयु के लोगों को परेशानी आती है। बुजुर्ग दम्पत्तियों के लिए तो यह एक बड़ी राहत वाला कदम है। नौजवानों के लिए आर्थिक सहायता भी है। इस योजना को लागू करने में स्थानीय स्तर पर सतर्कता रखनी होगी, क्योंकि अगर भाई-भतीजावाद शुरू हो गया तो फिर यह योजना घपले और घौटाले की शिकार हो जाएगी और सरकार की बदनामी का कारण बन सकती है।

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