संविधान खतरे में, स्वायत्त संस्थाएं भाजपा, आरएसएस के निशाने पर: खरगे

नयी दिल्ली{ गहरी खोज }: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संविधान को खतरे में बताते हुए भाजपा-आरएसएस पर शनिवार को तीखा हमला किया और कहा कि उनकी विचारधारा संविधान विरोधी है इसलिए चुनाव आयोग तथा उपराष्ट्रपति जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म कर संसदीय परंपरा को खत्म किया जा रहा है।श्री खरगे ने यहां विज्ञान भवन में कांग्रेस विधि विभाग के वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान सिर्फ़ एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की आत्मा है जो हर भारतीय को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे का अधिकार देता है लेकिन आज यही संविधान खतरे में है। सत्ता में बैठे लोग इसके मूल स्वरूप को बदलने की बात कर रहे हैं। भाजपा आरएसएस के बड़े-बड़े नेताओं का इरादा संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाना है जबकि इनकी पार्टी के संविधान में ये दोनों शब्द हैं। इस दोहरे रवैये से भाजपा और आरएसएस के चाल, चेहरा और चरित्र को समझा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा की जिम्मेवारी न्यायपालिका, चुनाव आयोग और मीडिया की है इसलिए इनकी स्वतंत्रता ज़रूरी है, लेकिन जब एक न्यायाधीश धर्म विशेष के लोगों के लिए अपशब्द बोलते हैं और उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। ऐसे समय में जब सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया से मुख्य न्यायाधीश को हटा दे और मीडिया को पूंजीपतियों के माध्यम से नियंत्रित करे तो यह लोकतंत्र नहीं तानाशाही है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों और दलितों के साथ भेदभाव आम हो गया है। प्रधानमंत्री चुनाव में ‘मटन, मुग़ल और मंगलसूत्र’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर समाज को बांटने का काम करते हैं और चुनाव आयोग इस पर मौन रहता है। इधर मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सघन अभियान चलाया जा रहा है जिसमें लाखों ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। बिहार में करीब 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गये हैं। पूरे देश में यही करने की इनकी योजना है। उनका कहना था कि संविधान निर्माताओं ने सबके वोट को समान मूल्य का अधिकार दिया है और यह पंडित नेहरू, डॉ अंबेडकर, संविधान सभा के सभी सदस्यों और कांग्रेस पार्टी की देन है।
श्री खरगे ने कहा कि आज भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की वजह से यही संवैधानिक अधिकार खतरे में हैं। उच्चतम न्यायालय ने इसकी गंभीरता को समझा है लेकिन न्यायालय की बार-बार की सलाह के बावजूद चुनाव आयोग ने आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड आदि को मतदान मतदाता सूची के लिए अधिकृत दस्तावेज मानने से इनकार कर दिया है। देश की एक फीसदी आबादी के पास 40 प्रतिशत संसाधन हैं। उच्च शिक्षा आम व्यक्ति की पहुँच से बाहर हो गई है। निजी कॉलेजों में साधारण स्नातक के लिए शुल्क 60 लाख रुपये तक है। सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं ताकि निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया जा सके। शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसर आज कमजोर वर्गों के लिए सपना बन गया है। विपक्षी सरकारों को गिराकर अल्पमत की सरकारें बनाना, नेताओं पर झूठे मुकदमे चलाना, सरकार से प्रश्न पूछने वालों को जेल में डालना, सूचना के अधिकार कार्यकर्ताओं की हत्याएं हो रही हैं और सूचना के अधिकार कानून को कमजोर करना आम बात हो गयी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्षी सांसदों को बोलने नहीं दिया जाता है। सरकार राज्य सभा में उपराष्ट्रपति के माध्यम से सांसदों की आवाज़ दबाने की कार्रवाई करते हुए रिकार्ड संख्या में सांसदों को निलम्बित कर रही थी। इन सब गतिविधियों से भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुश थे। लेकिन इसी बीच उपराष्ट्रपति को अपने पद की अहमियत का अहसास हुआ और उन्हें अचानक लगा कि वह एक स्वायत्त संस्था हैं। उनका कार्यकाल इतिहास मे दर्ज होगा और आगे याद किया जाएगा, तो वो स्वतंत्र होकर बात करने लगे और नियम के तहत खुद को मुखर करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायायल के न्यायाधीश शेखर यादव और न्यायाधीश यशवंत वर्मा के अभियोग का प्रस्ताव स्वीकार करने का मन बना लिया। श्री मोदी और भाजपा से यह बर्दाश्त नहीं हुआ और उपराष्ट्रपति का इस्तीफ़ा करवा दिया। यह इतिहास में पहली बार हुआ और यह संस्थाओं पर कब्जे का सबसे बड़ा उदाहरण है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कल ही उन्होंने उपसभापति को पत्र लिखकर सदन में अर्द्ध सैनिक बल सीआईएसएफ की मौजूदगी के बारे में आपत्ति दर्ज की है। सदन में बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए संविधान निर्माताओं ने संसदीय सुरक्षा सेवा की स्थापना की थी। इसके अधिकारियों को संसद के अनुरूप काम करने का प्रशिक्षण दिया जाता था और उनका नियंत्रण लोक सभा अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति के हाथ में था। मोदी सरकार ने इस सेवा के लोगों की अहमियत ख़त्म कर दी है। उनमें कई लोगों ने अपमानित होकर वीआरएस ले लिया है और सीआईएसएफ सीधा गृह मंत्री को रिपोर्ट करता है। उनकी तैनाती विपक्षी सांसदों को दबाने और डराने का प्रयास है। हम सरकार के इस कदम की घोर निंदा करते हैं। कांग्रेस ने संविधान का निर्माण किया और अब लोकतन्त्र की गरिमा को बचाने के लिये उसे लगातार कोशिश करनी होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस पर बड़ा आंदोलन करने जा रही है। भाजपा और हमारे विरोधी लोगों का जिन राज्यों में शासन है वहाँ हमारे कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ सच बोलने पर झूठे मुक़दमे किए जाते हैं। उन्हें डराने के लिए उनके परिवार के लोगों पर झूठे मुकदमें दायर हो रहे हैं और उनका मनोबल तोड़ा जा रहा है।