चाणक्य अनुसार इन मामलों में शर्म करना पड़ सकता है भारी, जानें क्यों

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धर्म { गहरी खोज } : चाणक्य नीति महान विद्वान, अर्थशास्त्री और कुशल राजनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य द्वारा रचित एक नीतिग्रंथ है, जिसमें जीवन, राजनीति, प्रेम संबंध, समाज, आचरण, शिक्षा और रिश्तों से जुड़े महत्वपूर्ण सिद्धांतों और अनुभवों को संकलित किया गया है। यह ग्रंथ आज भी व्यक्ति के निजी और सामाजिक जीवन को दिशा दिखाने में सहायक माना जाता है। चाणक्य कहते हैं कि जीवन में कुछ कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें करते समय शर्म नहीं बल्कि साहस और विवेक दिखाना चाहिए, वरना व्यक्ति को जीवन भर पछताना पड़ सकता है।

इस चीज में कभी न करें शर्म
चाणक्य अनुसार कभी भी दूसरों के सामने अपनी बात रखने में शर्म नहीं करनी चाहिए क्योंकि जो भी इस कार्य के समय शर्माता है उसका नुकसान हो जाता है। कई बार व्यक्ति सही होते हुए भी संकोच या शर्म के कारण अपनी बातें खुलकर सामने नहीं रख पाता जिससे आपको कामयाबी मिलने की संभावना कम हो जाती है।

भोजन करने में कभी न करें शर्म
आचार्य चाणक्य अनुसार व्यक्ति को भोजन करते समय भी शर्माना नहीं चाहिए क्योंकि जो इंसान खाने में शर्म करता है वह अक्सर भूखा रह जाता है। वहीं जब व्यक्ति का पेट भरा होता है, तभी वह कोई भी काम ढंग से कर पाता है। भूखे रहने से सोचने और समझने की क्षमता भी कम हो जाती है। इसलिए खाने-पीने में किसी तरह की शर्म नहीं करनी चाहिए।

पैसों के मामलों में भी न करें शर्म
चाणक्य कहते हैं कि जो पैसों के मामले में शर्म करता है उसका हमेशा नुकसान ही होता है। कई बार व्यक्ति अपने ही दिए पैसे वापस लेने में हिचकिचाता है सोचता है कि सामने वाला क्या सोचेगा। लेकिन चाणक्य के अनुसार, पैसों के लेन-देन में भी किसी तरह की शर्म न करें चाहे सामने वाले से आपका कितना ही अच्छा संबंध क्यों न हो। अगर आपने किसी को पैसे उधार दिए हैं, तो उसे वापस लेने में किसी तरह की शर्म न करें।

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