‘कॉस्ट प्राइज प्लस 50 प्रतिशत’ पर तय हो एमएसपी, याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: सुप्रीम कोर्ट में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर एक अहम याचिका पर सुनवाई हुई है। याचिका में मांग की गई है कि किसानों को उनकी फसल का उचित और वाजिब दाम मिले और एमएसपी तय करते समय खेती की पूरी असली लागत को ध्यान में रखा जाए। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि जो किसान अपनी फसल एमएसपी पर बेचना चाहते हैं, सरकार उनकी पूरी उपज खरीदे। इसके साथ ही हर गांव, ब्लॉक, तहसील और जिले में पर्याप्त सरकारी खरीद केंद्र बनाए जाने की मांग की गई है ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई परेशानी न हो। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी मांग रखी गई है कि किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए उनका कृषि कर्ज माफ किया जाए।
याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में दलील दी कि हर साल 10,000 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहे हैं और इसका एक बड़ा कारण एमएसपी का वास्तविक लागत से कम होना है। उन्होंने कहा कि एमएसपी कम से कम ‘कॉस्ट प्राइस प्लस 50 प्रतिशत’ के आधार पर तय होना चाहिए ताकि किसानों को सही लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि अभी सरकार मुख्य रूप से गेहूं और कुछ अनाज ही एमएसपी पर खरीदती है, जबकि अन्य फसलें किसानों के लिए मुश्किल पैदा करती हैं।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एमएसपी तय करने में कई तरह के मैथमेटिकल फॉर्मूले बताए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा जमीन, श्रम और पूंजी की लागत हर जगह अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में क्या एक ही नीति पूरे देश में लागू की जा सकती है या फिर इसे राज्यों और जिलों के हिसाब से अलग-अलग करना होगा?
प्रशांत भूषण ने अपनी दलील में कहा कि सरकार गरीबों को फ्री राशन दे रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसानों को उनकी लागत भी न मिले और वे नुकसान में चले जाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे देश की औसत लागत निकालकर किसानों को उसका उचित भुगतान किया जाए। सीजेआई ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में बड़े और छोटे किसानों की स्थिति अलग-अलग है, इसलिए सभी के लिए एक जैसी नीति बनाना आसान नहीं है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई में इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष सामने आएगा।

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