एक आवाज, कई भाषाएं: जब 20 से ज्यादा भाषाओं में गूंजा आशा भोसले का जादू

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी आवाज आज भी हर भाषा, हर सुर और हर दिल में जिंदा है। 92 साल की उम्र में उनके निधन की खबर ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया। वह संगीत की ऐसी मिसाल थीं, जिन्होंने अपनी आवाज से भाषा की सीमाओं को तोड़ दिया। उन्होंने अपने लंबे करियर में 20 से ज्यादा भारतीय और विदेशी भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने गाए, जो अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है। इसी असाधारण उपलब्धि के कारण उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।आशा भोसले ने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि कई अलग-अलग भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। हिंदी भाषा में उनके गाए ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘ये मेरा दिल’ और ‘चुरा लिया है तुमने’ जैसे गाने आज भी हर पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हैं। इन गानों में उनकी एनर्जी और अलग अंदाज साफ झलकता है।
मराठी भाषा, जो उनकी मातृभाषा भी रही, उसमें भी आशा भोसले ने कई यादगार गीत गाए। ‘बुगडी माझी सांडली’ और ‘माझ्या भावाला’ जैसे गानों ने उनको नई पहचान देने का काम किया। बंगाली भाषा में भी उनका योगदान कम नहीं रहा। ‘चोखे चोखे कोथा बोलो’ और ‘गुंजने डोले जे भ्रमर’ जैसे गीतों ने उन्हें बंगाली संगीत प्रेमियों के बीच खास जगह दिलाई। इन गानों में उन्होंने जिस तरह से शब्दों की भावना को पकड़ा, वह उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
दक्षिण भारतीय भाषाओं में भी आशा भोसले का जादू खूब चला। तमिल में उन्होंने ‘वेन्निला वेन्निला’ और ‘नी पार्था पारवाई’ जैसे गीत गाए। वहीं, तेलुगु और मलयालम में भी उन्होंने कई फिल्मों के लिए गाने रिकॉर्ड किए और अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज हर भाषा में इतनी सहज थी कि ऐसा महसूस ही नहीं होता था कि वह उस भाषा की मूल गायिका नहीं हैं।
आशा भोसले के कुछ लोकप्रिय भोजपुरी गाने भी रहे, जिनमें ‘मोरे होथवा से नथुनिया’, ‘गोरकी पतरकी रे’ और ‘राजा तोरी बगिया से’ जैसे गाने शामिल है। उर्दू और गजल के क्षेत्र में भी आशा भोसले का योगदान बेहद खास रहा। ‘दिल चीज क्या है’, ‘इन आंखों की मस्ती के’ और ‘ये क्या जगह है दोस्तों’ जैसे गजलों ने उन्हें एक अलग ऊंचाई पर पहुंचाया। आशा भोसले की सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। उन्होंने पॉप, भजन, गजल, कव्वाली और शास्त्रीय संगीत जैसे हर रूप में खुद को साबित किया। ‘राधा कैसे ना जले’ और ‘कमबख्त इश्क’ जैसे गानों से लेकर पारंपरिक भजनों तक, उन्होंने हर शैली में अपनी अलग छाप छोड़ी।

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