तीन राज्यों के चुनाव में बंपर वोटिंग का संदेश
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: देश में पांच राज्यों के चुनाव में से तीन राज्यों असम,केरल व पुड्डुचेरी विधानसभा के लिए रिकार्ड मतदान हुआ है। राज्य विधानसभा चुनाव में कम मतदान होता है तो उसका कुछ मतलब निकाला जाता है और ज्यादा मतदान होता है तो उसका कुछ मतलब निकाला जाता है।मतदान कम हो या ज्यादा उसका अपना मतलब निकाला जाता है। तीनों राज्यों में बंपर वोटिंग हुई है तो इसका मतलब तीनों राज्यों के लिए एक सा भी निकाला जा सकता है और तीनों राज्यों के लिए इसका मतलब अलग अलग भी निकाला जा सकता है।राज्यों के सरकार के कामकाज के आधार पर ही जनता तय करती है कि सरकार को बनाए रखना है या बदलाव करना है।
चुनाव आयोग के मुताबिक असम में ८५.६४ प्रतिशत, केरल में ७८.२८ प्रतिशत और पुड्डुचेरी में ८९.८१ प्रतिशत वोटिंग हुई है। आंकड़ों के मुताबिक तो असम व पुड्डुचेरी में यह अब तक की सबसे ज्यादा वोटिंग है।इससे पहले असम मेें २०१६ में ८४.७२ व पुड्डुचेरी में २०११ में ८५.५७प्रतिशत हुआ था।इसी तरह केरल में ३९ साल पहले यानी १९८७ में ८०.५६ प्रतिशत मतदान हुआ था। माना जा रहा है कि मतदान का अंतिम आंकड़ा आने पर तीनों राज्यों में वोटिंग प्रतिशत और बढ़ सकता है।केरल के २०२१ की वोटिंग की तुलना की जाए तो तब केरल में ७४.०६ प्रतिशत वोट पड़े थे यानी पिछली बार की तुलना में इस बार ४ प्रतिशत वोट ज्यादा पड़े हैं। इसी तरह असम में इस बार ८५.६४ की तुलना में २१ में ८२.०४ प्रतिशत वोट पड़े थे यानी इस बार असम में ३.६० प्रतिशत वोट ज्यादा पड़े हैं।इसी तरह पुड्डुचेरी में २१ में ७७.९ की तुलना में २६ में ८९.८१ प्रतिशत वोट पड़े हैं यानी ११.९१ प्रतिशत वोट ज्यादा पड़े हैं।
आमतौर पर मतदान प्रतिशत बढ़ने के दो मतलब निकाले जाते हैं पहला मतलब निकाला जाता है कि सरकार के विरोध मे लहर है और दूसरा मतलब निकाला जाता है कि सरकार के पक्ष में लहर है।असम में हिमंत विस्वा सरमा की सरकार है और मतदान के पहले जितने सर्वे या ओपिनियन पोल आए सब में बताया तो यही गया है कि हिमंत की सरकार वापसी कर रही है क्योंकि उन्होंने पांच साल अच्छा काम किया है। यानी उनके खिलाफ जनता में कहीं नाराजगी नहीं है या है तो इतनी कम है कि उससे चुनाव का रिजल्ट प्रभावित नहीं हो रहा है।२०१४ पहले माना जाता था कि पांच साल या दस साल किसी राजनीतिक दल के सत्ता में रहने पर जनता में उसके प्रति नाराजगी होती है लेकिन २०१४ के बाद माना यह जाता है कि सरकार अच्छा काम करती है तो जनता उसे दूसरी बार नहीं तीसरी बार भी मौका देती है।
हिमंत विस्व सरमा कभी असम में कांग्रेस के नेता हुए करते थे,अपनी उपेक्षा से वह भाजपा आए और आज असम में भाजपा को मजबूत बनाए हुए हैं।कांग्रेस और राहुल गांधी असम में भाजपा से ज्यादा हिमंत को हराने का सपना देख रही है क्योंकि राहुल गांधी यही चाहते हैं।राहुल गांधी ऐसा क्यों चाहते हैं क्योंकि राहुल गांधी की सबसे ज्यादा आलोचना हिमंत ने किया है,इससे राहुल गांधी की छबि धूमिल हुई है लेकिन लगता नहीं है कि कांग्रेस हिमंत के चुनाव में हरा सकेगी और राहुल गांधी का उनको जेल भेजने का सपना पूरा होगा। इसकी वजह यह है कि हिमंत ने पांच साल राज्य में किसी कांग्रेस नेता की तरह नहीं भाजपा नेता की तरह काम किया है यानी नो भ्रष्टाचार।इससे हिमंत की छबि जनता में साफसुथरी व कामकरने वाले नेता की बनी हुई है।असम को ऐसा नेता बरसों बाद मिला है, इसलिए माना जा रहा है कि जनता उन्हें फिर से काम करने का मौका देगी।
जहां तक पुड्डुचेरी का सवाल है तो यहां एनडीए कांग्रेस के गठबंधन की तुलना में मजबूत है और एनडीए की सरकार ने यहां पांच साल में अच्छा काम किया है।सरकार के अच्छे काम के कारण ही यहां ज्यादा वोटिंग को सरकार के पक्ष में लहर माना जा रहा है।वहीं केरल में कांग्रेस पिछली बार चुनाव हार गई थी इसलिए वह उम्मीद कर रही है कि इस बार यहां कांग्रेस के जीतने की संभावना ज्यादा है।कांग्रेस का मानना है कि यहां की वामपंथी सरकार पहले जैसी वामपंथी नहीं रह गई है, इसलिए जनता इस बार उसको हराएगी। जबकि मौजूदा सरकार को जीत की उम्मीद इसलिए है कि उसने जनता के हित में कई काम किए है, जनता को उसका लाभ मिला है इसलिए जनता उनको एक बार और मौका जरूर देगी। जहां तक भाजपा का सवाल है तो भाजपा इस बार कुछ सीटें जीत सकती हैं और उसका जनाधार पहले बढ़ सकता है।
