निर्वाचन आयोग ने प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापनों के प्री-सर्टिफिकेशन पर गाइडलाइंस जारी की

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: भारत निर्वाचन आयोग ने सोमवार को आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के लिए प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापनों के प्री-सर्टिफिकेशन पर विस्तृत गाइडलाइंस जारी की। इसका मकसद एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी माहौल सुनिश्चित करना है। चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के साथ-साथ छह राज्यों में उपचुनावों का शेड्यूल घोषित किया था। चुनाव आयोग ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार, संगठन या व्यक्ति चुनाव के दिन या उससे एक दिन पहले प्रिंट मीडिया में कोई भी विज्ञापन तब तक प्रकाशित नहीं करेगा, जब तक उसे राज्य या जिला स्तर पर मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से सर्टिफिकेशन न मिल जाए।
आयोग ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत उम्मीदवार और अन्य आवेदक सर्टिफिकेशन के लिए जिला एमसीएमसी से संपर्क कर सकते हैं, जबकि किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मुख्यालय वाले मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल राज्य-स्तरीय एमसीएमसी में आवेदन कर सकते हैं।
चुनाव शेड्यूल के अनुसार, प्रिंट विज्ञापनों का प्री-सर्टिफिकेशन कुछ खास तारीखों पर अनिवार्य होगा। असम, केरल और पुडुचेरी के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा। इसके लिए 8 और 9 अप्रैल को प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों के लिए प्री-सर्टिफिकेशन जरूरी होगा। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा। यहां प्री-सर्टिफिकेशन 22 और 23 अप्रैल के विज्ञापनों पर लागू होगा।
पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा। यहां पर पहले चरण के लिए 22 और 23 अप्रैल को, और दूसरे चरण के लिए 28 और 29 अप्रैल को प्री-सर्टिफिकेशन अनिवार्य होगा। भारत निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि प्री-सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन, विज्ञापन प्रकाशित होने की तय तारीख से कम से कम दो दिन पहले जमा किए जाने चाहिए। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए राज्य और जिला दोनों स्तरों पर एमसीएमसी को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि वे विज्ञापनों की जांच कर उन्हें तुरंत मंजूरी दे सकें।
इन कमेटियों को मीडिया में ‘पेड न्यूज’ (पैसे देकर छपवाई गई खबरों) के मामलों पर कड़ी नजर रखने और जहां भी जरूरी हो, उचित कार्रवाई करने का काम भी सौंपा गया है। इस बीच, आयोग ने 5 अप्रैल को बताया था कि चुनाव वाले राज्यों में उसने प्रवर्तन (कानून लागू करने) के संबंध में कई अहम कदम उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि एजेंसियों ने अब तक 650 करोड़ से ज्‍यादा की अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थ, कीमती धातुएं और मुफ्त चीजें जब्त की हैं, ताकि चुनाव बिना किसी प्रलोभन के हो सकें।

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