वैश्विक संकटों से भारत मजबूती से उबर रहा है: एस. जयशंकर

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत ने हाल के वैश्विक झटकों का मजबूती से सामना किया है। उन्होंने यह बात पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके आर्थिक असर के संदर्भ में कही। एस. जयशंकर ने आईआईएम रायपुर के दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में कहा कि बढ़ते वैश्विक तनाव के माहौल के बावजूद भारत ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की चुनौतियों को ‘काफी हद तक सफलतापूर्वक’ संभाला है।
उन्होंने कहा कि अब किसी भी क्षेत्र में होने वाले संघर्ष का असर सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्वीकरण के कारण उसका प्रभाव दुनिया के अन्य हिस्सों में भी महसूस किया जाता है। उन्होंने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है कि हाल के समय में कई वैश्विक झटकों ने हमारी मजबूती की परीक्षा ली है और भारत इनसे मजबूती के साथ बाहर निकला है।” मंत्री ने यह भी बताया कि फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में पैदा हुआ संकट वैश्विक ईंधन सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहा है और इससे हाइड्रोकार्बन की कमी भी देखी जा रही है। जयशंकर ने कहा कि मजबूत घरेलू क्षमताएं विकसित करना जोखिम को कम करने और रणनीतिक ताकत बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था की ओर भी इशारा किया, जहां ताकत और प्रभाव का संतुलन लगातार बदल रहा है, और कहा कि मौजूदा अस्थिरता संरचनात्मक है। उनके अनुसार, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, सैन्य क्षमता, कनेक्टिविटी और संसाधनों में तेजी से हो रहे बदलावों ने देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है।
उन्होंने कहा कि आज हर चीज का इस्तेमाल रणनीतिक रूप से किया जा रहा है, और कई मामलों में इसे हथियार की तरह भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इस वजह से अब देशों और आर्थिक नीतियों में जोखिम कम करने, विविधता बढ़ाने और मजबूती पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। जयशंकर ने कोविड-19 महामारी, जारी युद्ध और जलवायु परिवर्तन को इस दशक की सबसे बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, प्रतिनिधित्व वाली राजनीति और मजबूत नेतृत्व इन चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।

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