ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है ‘तारागिरी’, एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप युद्ध में है सक्षम

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: भारतीय नौसेना नीले समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए लगातार स्वदेशी युद्धपोतों को शामिल कर रही है। वर्ष 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तैयारियां तेज़ कर दी गई हैं। इसी क्रम में नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म लगातार नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को भारतीय नौसेना में प्रोजेक्ट 17ए के तहत नीलगिरी क्लास का एडवांस गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ शामिल किया गया।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नौसेना की परंपरा में यह माना जाता है कि किसी जहाज का नाम अपने साथ एक विरासत लेकर आता है। पहले भी आईएनएस तारागिरी ने लंबे समय तक देश की सेवा की थी और उसने नौसैनिक आत्मनिर्भरता की नींव को मजबूत किया था। आज उसी नाम को एक आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी नौसेना भारत के मूल्यों और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आईएनएस तारागिरी की कमीशनिंग हमारी नौसेना की ताकत, मूल्यों और प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करेगी, ऐसा विश्वास है। उन्होंने कहा कि 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा वाला और तीन ओर से समुद्र से घिरा भारत अपने विकास को समुद्र से अलग करके नहीं देख सकता। देश का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और हमारी ऊर्जा सुरक्षा भी समुद्र पर निर्भर करती है। ऐसे में एक मजबूत और सक्षम नौसेना हमारे लिए विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है।
प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास युद्धपोतों में से पहला एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी को जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था। इसके बाद इसी वर्ष हिमगिरी और उदयगिरी को भी शामिल किया गया। अब ‘तारागिरी’ को भी नौसेना में शामिल कर लिया गया है।
गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है, जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप युद्ध में अत्यंत सक्षम है। एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए इसमें लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘बराक-8’, एयर डिफेंस गन तथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’ और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं।
यह फ्रिगेट आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार से लैस है, जो लंबी दूरी से आने वाले खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसमें हेलिकॉप्टर हैंगर भी है, जिसमें दो हेलिकॉप्टर आसानी से उतर सकते हैं।
प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सभी सात फ्रिगेट में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं। इसका डिज़ाइन और स्टील भी पूरी तरह स्वदेशी है। इसका डिज़ाइन नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है। 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है।
प्रोजेक्ट 17ए के तहत सात नीलगिरी क्लास गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे हैं। इनमें से चार फ्रिगेट मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा बनाए गए हैं। वर्ष 2019 से 2022 के बीच इन सभी को लॉन्च किया जा चुका है।
‘तारागिरी’ नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट है, जिसे अब नौसेना में शामिल किया गया है, जबकि बाकी तीन के समुद्री परीक्षण जारी हैं। इन सभी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट के शामिल होने के बाद समुद्र में भारत की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
नीलगिरी क्लास के सभी युद्धपोतों का डिज़ाइन नेवल डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है। प्रोजेक्ट 17 और 17ए के सभी फ्रिगेट के नाम भारत की पर्वत श्रृंखलाओं पर रखे गए हैं, जैसे—शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरी, तारागिरी, उदयगिरी, दूनागिरी, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।

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