ट्रंप विरुद्ध प्रदर्शन

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  • इरविन खन्ना
    संपादकीय { गहरी खोज }:
    अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध पिछले एक महीने से चल रहा है और युद्ध के लम्बा चलने को देखते हुए अमेरिका अब जमीनी जंग लड़ने की तैयारी में जुट गया है। अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपने कई युद्धपोतों समेत हजारों सैनिक और विशेष कमांडो को वहां तैनात करना शुरू कर दिया है। अमेरिका की जमीन जंग की तैयारियों को देखते हुए ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके जवान इंतजार कर रहे हैं और शत्रु देशों के सैनिकों की कब्र खोदने को तैयार हैं।

उपरोक्त स्थिति के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के विरुद्ध अमेरिका के 50 प्रांतों में ईरान युद्ध को लेकर और राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के विरुद्ध 50 प्रांतों के 3200 जगहों पर 80 से 90 लाख लोग सड़कों पर उतरे। अमेरिका के अलावा भी यूरोप, लातिन अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया समेत कम से कम 12 देशों में भी विरोध-प्रदर्शन हुए। इन आयोजनों का नेतृत्व कर रहे संगठन इंडिविजिबल के सह-कार्यकारी निदेशक एज्जा लेविन के अनुसार लोकतांत्रिक देशों में लोग इन प्रदर्शनों को ‘नो टायरंट्स’ यानी ‘कोई तानाशाह नहीं’ के नाम से जानते हैं। रोम में हजारों लोग सड़कों पर उतरे और उन्होंने प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलनी के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने इस्राइल और अमेरिका की तरफ से ईरान पर किए गए हमलों के विरोध में बैनर भी लहराए। कई बैनरों में ट्रंप, मेलनी और इस्त्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरें थीं और उनके खिलाफ नारे लिखे गए थे। किंग्स रैली ऐसे समय में हुई जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव वर्ष के अंत में होने वाले हैं। अमेरिका, इस्त्राइल के साथ ईरान युद्ध में फंस चुका है जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल की बढ़ती कीमतों ने लोगों को झकझोर दिया है और सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी की मुसीबतें बढ़ गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर जब हमला किया था तो उसको आशा थी कि खामेनेई सरकार के विरुद्ध जो लोग हैं वह सड़कों पर उतर आयेंगे और अमेरिका अपना लक्ष्य हासिल कर लेगा। ट्रंप ने जो सोचा था आज हो उसके उलट रहा है। ईरान के लोग आपसी मतभेद भुलाकर अमेरिका विरुद्ध एकजुट दिखाई दे रहे हैं, जबकि अमेरिका सहित कई अन्य देशों में ट्रंप विरुद्ध प्रर्दशनकारी सड़कों पर उतर आये हैं।

ट्रंप अगर अगले कुछ दिनों में युद्ध को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाता और युद्ध इसी तरह लम्बा खिंचता चला गया तो ट्रंप के लिए कठिनाइयां देश के भीतर और बाहर बढ़ती चली जाएंगी। अमेरिका व ईरान में हो रहे युद्ध के कारण विश्व की आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। महंगाई बढ़ रही है और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की तंगी आनी शुरू हो गई है। जनसाधारण परेशान हैं।

उपरोक्त स्थिति को देखते हुए अमेरिका में ट्रंप विरुद्ध प्रदर्शन हो रहे हैं। युद्ध में अरबों-खरबों रुपए के नुकसान होने तथा जान-माल की हानि को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न हुई स्थिति पर गंभीरतापूर्वक विचार कर समस्या का कोई स्थाई हल ढूंढा जाना चाहिए इसी में विश्व की भलाई है।

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