एलआईसी धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने सालों से फरार घोषित अपराधी को पकड़ा

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लखनऊ{ गहरी खोज }[: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से जुड़े एक वित्तीय धोखाधड़ी मामले में घोषित अपराधी समीर जोशी को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, सीबीआई ने 13 अगस्त, 2012 को एलआईसी, लखनऊ से मिली एक शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने धोखाधड़ी वाली बीमा पॉलिसियों के लिए जाली चेक बनाकर बड़े पैमाने पर पैसों का गबन किया।
जांचकर्ताओं ने बताया कि ये चेक ऐसे पॉलिसीधारकों के नाम पर जारी किए गए थे, जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं था। इस तरह आरोपी ने पैसों का गबन किया और धोखाधड़ी को छिपाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर किया।
अधिकारियों ने बताया कि 6,37,66,660 रुपए की वित्तीय अनियमितताएं फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच लखनऊ के जानकीपुरम स्थित एलआईसी कार्यालय में हुई थीं। जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 21 अगस्त 2014 को समीर जोशी सहित 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। अधिकारियों ने बताया कि समीर जोशी ने उस समय एलआईसी में हायर ग्रेड असिस्टेंट के पद पर कार्यरत पंकज सक्सेना के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची थी, जिसके तहत जोशी, उनकी पत्नी अंजू जोशी और उनके कर्मचारी जितेंद्र कुमार के नाम पर फर्जी चेक तैयार किए गए थे।
उन्होंने आगे बताया कि इन धोखाधड़ी वाले लेन-देन से प्राप्त लगभग 62 लाख रुपए की राशि को कैश कराया गया और आरोपियों के बीच आपस में बांट लिया गया। जांच के दौरान जोशी को शुरू में गिरफ्तार किया गया था, और बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। हालांकि, बाद में उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया और कई सालों तक फरार रहे। अधिकारियों ने बताया कि 24 दिसंबर, 2025 को उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘घोषित अपराधी’ घोषित कर दिया गया था।
सूत्रों से मिली नई जानकारियों के आधार पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने उनकी लोकेशन का पता लगाया और 31 मार्च को लखनऊ के एक मेट्रो स्टेशन से उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार के बाद मंगलवार को जोशी को संबंधित ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किया गया, जिसने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

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