मेघाहातुबुरु में सेस्बीएफ फंड को लेकर श्रमिकों का प्रदर्शन, प्रबंधन पर साजिश का आरोप

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पश्चिमी सिंहभूम{ गहरी खोज }: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मेघाहातुबुरु क्षेत्र में बुधवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब झारखंड मजदूर संघर्ष संघ की मेघाहातुबुरु इकाई के बैनर तले श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। महासचिव आफताब आलम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मजदूरों ने सेल (भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड) प्रबंधन के खिलाफ जनरल कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया और महाप्रबंधक (मानव संसाधन) अमित विश्वास को अपनी मांगों से संबंधित विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने स्पष्ट कहा कि सेस्बीएफ (सेल कर्मचारी अधिवर्षिता लाभ कोष) उनकी गाढ़ी कमाई है,जिसे किसी भी हालत में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में जबरन स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि यह एक ट्रस्ट आधारित कोष है, जिसमें कर्मचारियों के वेतन से प्रतिमाह दो प्रतिशत राशि काटी जाती है और सेवानिवृत्ति के समय यह पूरी राशि ब्याज सहित संबंधित कर्मचारी को वापस दी जाती है।
मजदूरों ने 5 मार्च 2026 को जारी सर्कुलर पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें 1 अप्रैल 2026 से ट्रस्ट को समाप्त करने की बात कही गई है,लेकिन जमा राशि के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उनका आरोप है कि प्रबंधन बिना कर्मचारियों की सहमति के इस राशि को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में स्थानांतरित करने की तैयारी कर रहा है,जो गैरकानूनी है और ट्रस्ट नियमों का सीधा उल्लंघन है।
आफताब आलम ने कहा कि सेस्बीएफ एक अपरिवर्तनीय ट्रस्ट है,जिसे किसी बोर्ड बैठक या प्रशासनिक निर्णय से समाप्त नहीं किया जा सकता। यदि इसे बंद किया जाता है तो प्रत्येक कर्मचारी को उसकी जमा राशि ब्याज सहित वापस करना अनिवार्य है। उन्होंने प्रबंधन से ट्रस्ट डीड की प्रमाणित प्रति, कोष की वर्तमान स्थिति और पूरी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान ठेका मजदूरों ने भी अपनी समस्याएं उठाईं। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन,कार्य के अनुसार पदोन्नति,स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता, मेघाहातुबुरु ओपीडी में नियमित चिकित्सक और फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ की नियुक्ति तथा राउरकेला रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए वातानुकूलित एंबुलेंस सुविधा की मांग की। मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और सेस्बीएफ की राशि कर्मचारियों को वापस नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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