भारतीय नौसेना के लिए तैयार अगली पीढ़ी का पहला अपतटीय गश्ती पोत ‘शची’ लॉन्च

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: भारतीय नौसेना के लिए तैयार किये जा रहे 11 अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत में से पहला ‘शची’ मंगलवार को परीक्षण के लिए समुद्र में उतार दिया गया। गोवा में नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती की मौजूदगी में उनकी पत्नी शगुन सोबती ने नौसैन्य परम्पराओं के साथ लॉन्च किया। अपतटीय गश्ती पोत जैसे प्लेटफॉर्म को नौसेना में शामिल करना इसलिए जरूरी है, ताकि हम मौजूदा और नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें।
अपतटीय गश्ती पोतों का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स में एक साथ किया जा रहा है। ये देश में बने जहाज रक्षा और निगरानी, खोज और बचाव, अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा, राहत एवं बचाव और समुद्री डकैती विरोधी मिशन जैसे मल्टी डोमेन को बढ़ाएंगे। इन जहाजों के नाम भारतीय पौराणिक कथाओं से लिए गए हैं, जिसमें पहले जहाज का नाम ‘शची’ है, जिसका मतलब है मदद करने वाला। इसके क्रेस्ट डिजाइन में अर्सा मेजर तारामंडल और एक लाल और सफेद लाइट हाउस दिखाया गया है। यह स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में भारतीय नौसेना की कोशिश में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
इस मौके पर वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भू-राजनैतिक माहौल को बनाने में भारतीय नौसेना की भूमिका और भी अहम होती जा रही है। हाल के वैश्विक विकास एक मजबूत नेवी की जरूरत को और पक्का करते हैं। बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और झगड़ों के साथ नौसेना भारत की समुद्री ताकत का मुख्य उदाहरण और कूटनीति एवं क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक जरूरी जरिया बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि अपतटीय गश्ती पोत जैसे प्लेटफॉर्म को नौसेना में शामिल करना जरूरी कदम है, ताकि हम मौजूदा और नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि यह मेक इन इंडिया मिशन के साथ मिलकर आत्मनिर्भर भारत के नेशनल विजन की एक मजबूत झलक है। यह देश के अंदर मुश्किल नेवल प्लेटफॉर्म को डिजाइन और बनाने की भारत की क्षमता को दिखाता है। हमारे आसपास के समुद्र ट्रेड, एनर्जी और कनेक्टिविटी की लाइफलाइन हैं।
उन्होंने कहा कि नौसेना को समुद्री खतरों के खिलाफ पसंदीदा सुरक्षा भागीदार और सबसे पहले जवाब देने वाले के तौर पर अपनी पहचान बनाए रखने की जरूरत है, ताकि हम इस रीजन में समुद्री सुरक्षा पक्का करने के साथ ही दुश्मन ताकतों को यहां अपनी मौजूदगी बनाने से रोक सकें।

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