मप्र में हाइवे पर सफर होगा महंगा: 1 अप्रैल से टोल टैक्स में 5–10 फीसद बढ़ोतरी

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राज्य में रोजाना 20–35 लाख वाहन होंगे प्रभावित

भोपाल{ गहरी खोज }: नए वित्तीय वर्ष 2026–27 की शुरुआत के साथ आम लोगों की जेब पर कई तरह से असर पड़ने जा रहा है। जिसमें कि एक प्रकार नेशनल हाईवे भी है, यहां से गुजरना अब पहले से महंगा हो जाएगा। एक अप्रैल से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने टोल टैक्स दरों में करीब पांच से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का फैसला किया है, जोकि देशभर के हाईवे उपयोगकर्ताओं पर लागू होगी। इस फैसले का सीधा असर मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य पर भी पड़ेगा, जहां हाईवे नेटवर्क तेजी से विकसित हुआ है।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जहां नेशनल हाईवे का विस्तृत नेटवर्क है। वर्तमान में राज्य में लगभग 44 नेशनल हाईवे संचालित हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 9,000 किलोमीटर से अधिक है। यह नेटवर्क राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक, कृषि और व्यापारिक केंद्रों से जोड़ता है।
इसी नेटवर्क पर हर दिन भारी मात्रा में यातायात होता है। ट्रैफिक इंजीनियरिंग के औसत एनुअल एवरेज डेली टेरिफ यानी (वार्षिक औसत दैनिक यातायात) के आधार पर अनुमान है कि मध्य प्रदेश के नेशनल हाईवे पर रोजाना 20 लाख से 35 लाख वाहन गुजरते हैं। इनमें कार, बस, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहन शामिल हैं। खास बात यह है कि मालवाहक ट्रकों की हिस्सेदारी कई मार्गों पर 40–50 प्रतिशत तक होती है, जिससे यह नेटवर्क राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन जाता है।
हाईवे पर भारी ट्रैफिक का सीधा असर टोल कलेक्शन पर भी दिखाई देता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में टोल से होने वाली सालाना आय तेजी से बढ़ी है। जहां वर्ष 2020–21 में यह लगभग ₹2,178 करोड़ थी, वहीं हाल के वर्षों में यह बढ़कर करीब ₹4,188 करोड़ सालाना तक पहुंच गई है। यदि इसे दैनिक आधार पर देखें, तो राज्य में नेशनल हाईवे पर लगभग ₹10 से ₹12 करोड़ प्रतिदिन टोल वसूला जाता है। यह राशि दर्शाती है कि हाईवे परिवहन का साधन होने के साथ ही सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत भी हैं।
अब नई दरों के लागू होने के बाद निजी वाहन चालकों से लेकर व्यावसायिक वाहनों तक सभी को पहले से अधिक शुल्क चुकाना होगा। औसतन पांच से 10 प्रतिशत की वृद्धि का मतलब है कि रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के खर्च में सीधी बढ़ोतरी होगी। बताया जाता है कि इसका सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ेगा। ट्रकों और भारी वाहनों के लिए टोल खर्च बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका असर धीरे-धीरे बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। यानी आम उपभोक्ता को अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
टोल टैक्स बढ़ोतरी के साथ ही फास्टेग उपयोगकर्ताओं को भी झटका लगा है। इसके सालाना पास की कीमत में लगभग ₹75 तक की बढ़ोतरी की गई है। इससे नियमित रूप से टोल प्लाजा पार करने वाले वाहन चालकों का खर्च और बढ़ जाएगा। हालांकि, फास्टेग के जरिए डिजिटल भुगतान से वाहन चालकों को लंबी कतारों से राहत मिलती है और समय की बचत होती है। सरकार भी कैशलेस भुगतान को बढ़ावा दे रही है, जिससे ट्रैफिक सुचारु बना रहे।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) के अधिकारियों के मुताबिक, टोल दरों में संशोधन हर साल महंगाई, रखरखाव और निर्माण लागत को ध्यान में रखकर किया जाता है। नेशनल हाईवे के विस्तार, मरम्मत और सुरक्षा सुधार पर लगातार बढ़ते खर्च के कारण यह बढ़ोतरी जरूरी मानी जाती है। मध्य प्रदेश में तेजी से बन रहे एक्सप्रेसवे और फोरलेन/सिक्सलेन हाईवे इस बढ़ते खर्च का उदाहरण हैं। बेहतर सड़कें, तेज कनेक्टिविटी और कम यात्रा समय के लिए सरकार बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है, जिसकी लागत टोल के माध्यम से आंशिक रूप से वसूली जाती है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के जिन मार्गों पर पहले से अधिक ट्रैफिक है, जैसे भोपाल-इंदौर, जबलपुर-नागपुर या ग्वालियर-आगरा, वहां यह असर सबसे अधिक महसूस किया जाएगा। दूसरी ओर, राज्य में प्रतिदिन चलने वाले 20–35 लाख वाहनों और ₹10–12 करोड़ दैनिक टोल कलेक्शन को देखते हुए यह साफ है कि यह बढ़ोतरी लाखों लोगों और हजारों व्यवसायों को सीधे प्रभावित करेगी।ृ

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