जनजातीय खिलाड़ियों को प्रतिभा दिखाने का मौका मिला
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: छत्तीसगढ़ में देश के पहले खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स का शुभारंभ हुआ यह राज्य के लिए गौरव की बात है।इस आयोजन में ३० राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के २५०० खिलाड़ी ९ खेल स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।माना जाता है कि जनजातीय खिलाड़ियों को उनकी खेल प्रतिभा को दिखाने का ज्यादा मौका नहीं मिलता है, इस आयोजन से उनको अब साल में एक बार अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।इससे उनकी अब राज्यस्तर पर पहचान बनेगी और उनको राज्य से आगे के खेल मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका भी मिलेगा।साय सरकार के आने के बाद जनजातीय समाज को उठाने का जो प्रयास किया गया है, उस कड़ी में खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स एक अहम पड़ाव है।साय सरकार ने कहा है कि यह आयोजन अब हर साल होगा इससे जनजातीय खिलाडि़यों को हर साल अपनी खेल प्रतिभा को दिखाने व निखारने का मौका भी मिलेगा।
इस आयोजन की शुरुआत पर सीएम साय ने कहा है कि खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स एक आयोजन नहीं है यह एक आंदोलन की शुरुआत है।यह एक ऐसा आंदोलन है जो संदेश देता है कि प्रतिभा की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती।उत्कृष्टता की कोई हद नहीं होती। जनजातीय भारत का दिल भी उतनी ही मजबूती से धड़कता है जितना देश के अन्य हिस्सों में धड़कता है।रायपुर के मैदानों से लेकर बस्तर के हरे भरे क्षेत्रों व अंबिकापुर के ऊंचे इलाकों तक जनजातीय समुदायों में स्वाभाविक व अद्भुत खेल प्रतिभा मौजूद है।जो परंपराओं व संघर्षों से निखरी है । उनको अपनी प्रतिभा दिखाने का जितना मौका मिलेगा वह और निखरेगी और प्रदेश व देश का गौरव हर मंच पर बढ़ाएगी। छत्तीसगढ़ की करीब २०० सदस्यीय टीम इसमें हिस्सा ले रही है।इसमें १६५ खिलाड़ी हैं,जिसमें ८७ पुरुष व ७८ महिला खिलाडी हैं।छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी फुटबाल,हाकी,एथलेटिक्स,तैराकी,तीरंदाजी,वेटलिफ्टिंग,कुश्ती में भाग ले रहे हैं।इन खेलों में तैराकी में २४,कुश्ती में १८,वेटलिफ्टिंग में १६,तीरंदाजी में १०,एथलेटिक्स में ३४,हाकी में २ व फुटबाल में २ स्वर्णपदक दांव पर है। सभी राज्यों के खिलाड़ी स्वर्ण के साथ रजत व कांस्य पदक जीतने का प्रयास कर रहे हैं।
राज्य में हो रहे खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स में छत्तीसगढ़ की दो आदिवासियों बेटियों ने साबित किया है कि इरादा कुछ कर गुजरने का हो तो सफलता जरूर मिलती है।शनिवार को निकिता ने ७७ किलो वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता।वहीं रविवार को रिशिका ने ८६ किला वर्ग में रजत पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़़ाया है।वहीं लक्की बाबू मरकाम ने कांस्यपदक जीता है।इस तरह २९ मार्च तक छत्तीसगढ़ ने एक गोल्ड,५ सिल्वर व ४ कांस्य पदक जीते हैं। यह दूसरे राज्यों की तुलना में बहुत कम लगता है लेकिन यह तो शुरुआत है। किसी को भी शुरूआत में बड़ी सफलता नहीं मिलती है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है। राज्य के जनजातीय खिलाड़ियों को अब हर साल मौका मिलेगा तो वह भी एक दिन राज्य के लिए ज्यादा स्वर्ण, ज्यादा रजत व ज्यादा कांस्य पदक जीतेंगे।
पदक सूची में पहले नंबर पर स्वर्ण,रजत व कांस्य पदक सबसे ज्यादा कर्नाकट ने २५ पदक जीते हैं, इसमें सबसे ज्यादा स्वर्ण पदक है। इससे पता चलता है कि यहां की सरकार ने अपने खिलाड़ियों को खूब तैयारी करा कर भेजा है। खिलाड़ियों को हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराई है। उसके बाद ओड़िशा व असम के खिलाड़ियों ने कुल २० से ज्यादा पदक जीतकर अपने राज्य का गौरव बढ़ाया है।इससे साफ हो जाता है कि जिस राज्य ने अपने खिलाड़ियों को संवारने,निखारने का ज्यादा प्रयास किया है, उसके खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन कर साबित किया है कि प्रतिभा होना काफी नहीं होता है, उसे संवारने व निखारने का प्रयास भी करना पड़ता है। उसके लिए हर तरह के सुविधा साधन की जरूरत होती है। खेल मैदानों की जरूरत होती है, प्रशिक्षकों की जरूरत होती है।तैराकी में कर्नाटक के खिलाड़ी मणिकांता एल ने ८ गोल्ड व एक सिल्वर मेडल जीतकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। इससे साफ हो जाता है कि प्रतिभावान खिलाड़ी को ठीक से संवारा व निखारा जाए तो वह एक नहीं कई गोल्ड पदक राज्य के लिए जीत सकता है।
छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों के लिए जिस तरह के सुविधा से साधनों की जरूरत है,उसकी कमी का एहसास होता है।इससे राज्य की खेल प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का पूरा मौका नहीं मिल पाता है। राज्य में खेल प्रतिभा तो है लेकिन उनको संवारने व निखारने के लिए जितने सुविधा साधन है उससे और ज्यादा सुविधा साधन की जरूरत है।खेल के लिए ३०० करोड़ का बजट सुनने में ज्यादा लगता है लेकिन हकीकत यह है कि राज्य के कुल बजट का यह ०.२ प्रतिशत ही है। खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देेना है तो इस बजट को और बढ़ाना होगा और खेल तथा आयोजन के पहले अच्छी तैयारी करनी होगी। यानी हमें खेल का आयोजन ही नहीं करना है, आयोजन कर रहे हैं तो हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी सबसे अच्छा होना चाहिए। पदक सूची में छत्तीसगढ़ को पहले पांच स्थान पर होना चाहिए। यह राज्य सरकार व खिलाड़ियों का लक्ष्य होना चाहिए।छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी जब ज्यादा गोल्ड मेडल जीतेंगे तब यह माना जाएगा कि सरकार ने खेल व खिलाड़ियों के शानदार काम किया है।
