आदत है और आदत जल्दी बदलती नहीं है

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
सरकारी कर्मचारियों की काम करने की अपनी एक आदत होती है। बरसों से वह अपने आदत के अनुसार ही काम करते आए हैं।वह मानते हैं कि जितना काम वह करते हैं, वह बहुत है और वह गलत हो नहीं सकता। होता यही आया है,माना यही जाता रहा है कि सरकारी कर्मचारी जो काम कर दे, वही बहुत है,वही सही है इसलिए उसमें मीन मेख नहीं निकाला जाता है।यह पूछा नहीं जाता है कि यह काम कैसे किया गया है,कोई जांच करने वाला तो होता नहीं है कर्मचारी को जो काम सौंपा गया है,वह कैसे कर रहा है, वह ठीक से कर रहा या नहीं कर रहा है।उसने जो रिपोर्ट बनाई है वह सही है या नहीं है।यही वजह है कि कई बार अधिकारियों की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान लग जाता है कि वह अहम काम भी ढंग से नहीं करा पाते है।

छत्तीसगढ़ में एक के बाद एक जिले में अफीम की खेती का मामला सामने आने पर सीएम साय ने राज्य के सभी कलेक्टरों से कहा था कि वह अपने जिले में सख्ती से सर्वेे कराकर बताए कि उनके जिले में कहीं पर अफीम की खेती हो रही है या नहीं हो रही है।अब कलेक्टर तो कलेक्टर होते हैं,वह खुद तो खेतों में जाकर जांच नहीं कर सकते कि अफीम की खेती कहां हो रही है। कहां नहीं हो रही है।उन्होंने सरपंच,पटवारी से लेकर खेती के क्षेत्र से जुड़े तमाम विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों को लगा दिया कि आप लोग खेतों में जाकर जांच करें और पता लगाएं कि कहीं पर अफीम की खेती तो नहीं हो रही है। सीएम साय ने कलेक्टरों को १५ दिन का वक्त दिया था और कलेक्टरों ने अपने अधीनस्थों को यह काम सौंप दिया।१५ दिन बाद जो रिपोर्ट सीएम को सौंपी गई उसमें बताया गया कि जितना पता चला है उतनी ही जगह अफीम की खेती हो रही था।यानी ३३ जिलों में से तीन ही जिलों में अफीम की खेती हो रही है। इसके अलावा कहीं नहीं हो रही है। इसका मतलब है कि सरकारी अमला कलेक्टर से लेकर सरपंच तक यह पता नहीं लगा सके कि और कहीं पर अफीम की खेती हो रही है।

प्रदेश के सभी ३३ जिलों की जो रिपोर्ट कलेक्टरों ने सीएम को भेजी है। उसमें बताया गया है कि बलरामपुर-रामानुजगंज,दु्र्ग और रायगढ़ जिले में ही कुछ छह मामलों मे अफीम की खेती की पुष्टि हुई है।रायगढ़ जिले में तो निजी भूमि के साथ केलो परियोजना की शासकीय भूमि में भी अवैध अफीम की खेती पाई गई।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों ने रिपोर्ट सौंप दी है।सिर्फ तीन जिलों में ही अफीम की खेती की पुष्टि हुई है। राज्य में कहीं भी अफीम की खेती सहन नहीं की जाेगी और इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार अफीम की खेती के मामले में लीपापोती कर रही है।जिला कलेक्टरों को क्लीन चिट देने का मतलब है कि मादक पदार्थों की खेती पर केवल दिखावटी कार्रवाई की जा रही है।कांग्रेस ने सवाल उठाया था कि यदि किसी जिले में अफीम की खेती पाए जाने के बाद भी कलेक्टरों ने नकार दिया है तो क्या उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

कलेक्टरों के रिपोर्ट सौंपने के कुछ दिन तो ऐसा लगा कि सरपंच से लेकर कलेक्टरों ने वाकई बड़ी मेहनत फील्ड पर उतर यह रिपोर्ट बनाई है, सही बात है कि राज्य में कहीं अफीम की खेती नहीं हो रही है।लेकिन कोंडागांव जिले के केशकाल ब्लाक ग्राम पावारास में मक्के की फसल के बीच गांजा के ६८६ पौधों का पता चला।राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में मक्का के खेत से गांजा के पौधे जब्त किए गए।जिसकी अनुमानित कीमत १० लाख रुपए बताई गई है।इससे फिर साफ हो गया कि सरकारी कर्मचारी कोई भी काम ठीक से नहीं करते हैं।उनको सीएम ने जोे काम सख्ती व बारीकी से करने को कहा था वह काम भी उन्होंने सख्ती व बारीकी से नहीं किया।यही वजह है यह रिपोर्ट देने के बाद कि तीन जिलों के अलावा कहीं अफी्म की खेती नहीं होरही है।एक जिले में गांजा के खेती मिल जाती है।जिस लापरवाही से गिरदावरी की जाती है उसी लापरवाही से सीएम के आदेश पर जांच भी होती है।

सरपंच से लेकर कलेक्टर तक कहने को कह सकते हैं कि सीएम साय ने तो उनको अफीम की खेती की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था, सीएम के आदेश के अऩुरूप सरपंच से लेकर कलेक्टर ने ३३ जिलों में जांच की और पाया कि तीन जिलों मे ही अफीम की खेती की गई है और कहीं पर अफीम की खेती नहीं की गई है। सरपंच से लेकर कलेक्टर तक कह सकते हैं कि हमको तो गांजा की खेती के बारे में कुछ कहा नहीं गया था इसलिए हमने तो गांजा की खेती की खेतों मे जांच नहीं की। इसलिए हमें गांजा की खेती का पता नहींं चला।सही बात है कि सरपंच हो या कलेक्टर हो सब उतना ही काम करते हैं जितना काम उनको करने के लिए कहा जाता है।सीएम ने कहा था अफीम की खेती की जांच करनी है तो उन्होंने तो उतना ही काम किया है अफीम की खेती ३०जिलो में नहीं हो रही है।यह जांच रिपोर्ट तो सही है।जब सीएम कहेंगे की अब ३३ जिलों में गांजा की खेती हो रही है क्या पता करो तब सरपंच से लेकर कलेक्टर तक जांच करेंगे और बताएंगे कहां कहां गांजा की खेती हाे रही है।

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