प्लास्टिक का जहर ले रहा लोगों की जान, हर 30 सेकंड में हो रही है एक मौत, बाबा रामदेव से जानें इससे बचाव के आसान उपाय

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लाइफस्टाइल डेस्क { गहरी खोज }: क्या आप भी डिस्पोज़ल कप में चाय-काफी की सिप लेते हैं।प्लास्टिक की थैलियों में सामान घर लाते हैं।स्कूल-ऑफिस के लिए प्लास्टिक के टिफिन में खाना पैक होता है और ड्रिंक्स पीने के लिए प्लास्टिक स्ट्रॉ का इस्तेमाल करते है।अगर हां, तो अब आपको अपनी सेहत को लेकर सावधान हो जाना चाहिए। क्योंकि प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल अब इंसानी ज़िन्दगी पर भारी पड़ने लगा है।

दरअसल, बाज़ार में बिकने वाली पानी का बोतल पूरी तरह खत्म नहीं होता बल्कि ये छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता हैं।जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहते हैं जो हमें आंखों से दिखाई नहीं देते और पानी, मिट्टी, हवा में घुलकर शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं।यानी एक इंसान हफ्ते में करीब 5 ग्राम माइक्रोप्लास्टिक निगल रहा है जो लिवर, किडनी, हार्ट को डैमेज कर रहा है।यही कारण है कि प्लास्टिक की वजह से दुनिया में हर 30 सेकंड में एक मौत होती है। बाबा रामदेव कहते हैं कि ऐसा शायद ही कोई होगा जिसके शरीर में माइक्रोप्लास्टिक ना हो इसलिए सवाल ये है कि माइक्रोप्लास्टिक के हमले से दिल-दिमाग, लिवर-किडनी को कैसे बचाएं?

प्लास्टिक के इस्तेमाल से कौन सी समस्याएं हो सकती हैं?
प्लास्टिक बना दिमाग का दुश्मन: माइक्रोप्लास्टिक ब्रेन तक पहुंचकर बारीक कणों के रूप में प्रोटीन से जुड़ता है, जिससे पार्किंसन जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी का खतरा बढ़ता है और दुनिया में इसके करीब 85 लाख मरीज हैं। प्लास्टिक के गर्म होने पर उसमे मौजूद ‘बिसफेनॉल-ए’ कैमिकल खाने पीने की चीज़ों में घुलकर शरीर के अंदर पहुंच जाता है। याददाश्त कमजोर करता है और ब्रेन की सीखने-समझने की क्षमता को धीमा कर देता है।

हृदय संबंधी बीमारियां का खतरा: हवा में तैरते कण सांस के जरिए शरीर में जाकर खून में मिलते हैं और दिल तक पहुंचते हैं, जिनका आकार करीब 700 नैनोमीटर तक होता है। इन कणों के जमा होने से सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव, और हृदय संबंधी बीमारियां का खतरा बढ़ सकता है।

किडनी के दुश्मन: कागज के कप भी हमारी सेहत के लिए हानिकारक होते हैं क्योंकि इन कप को वाटरप्रूफ बनाने के लिए भी इसमें प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें लगी प्लास्टिक परत से गर्म चाय में घुलकर करीब 25 हजार माइक्रोप्लास्टिक कण शरीर में पहुंच जाते हैं जो किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं।

प्लास्टिक की जगह किन चीजों का करें इस्तेमाल?
रसोई में करें बदलाव:
प्लास्टिक के इस्तेमाल से शरीर को बहुत ज़्यादा नुकसान होता है।इसलिए, सबसे पहला बदलाव आप अपने रसोई में करें। अपनी रसोई में आप प्लास्टिक की सभी चीजों को बाहर करें। इसकी जगह आप स्टील और लोहे के बर्तन, कॉपर की बोतल और माइक्रोवेव में कांच के बर्तन का इस्तेमाल करें ताकि प्लास्टिक से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।

प्लास्टिक की जगह इन चीजों का करें इस्तेमाल: प्लास्टिक की चीज़ों को बदलकर वुडन ईयर बड्स, बांस की स्टिक, कपड़े या पेपर के झंडे, स्टील के कप-गिलास/कुल्हड़, स्टील-बांस के चम्मच, पेपर स्ट्रॉ, लकड़ी के चाकू और लकड़ी-स्टील या मिट्टी की ट्रे जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाएं।

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