ट्रेनों में 78 प्रतिशत सीटें सामान्य और स्लीपर वर्ग की : वैष्णव

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेल में लगभग 78 प्रतिशत सीटें सामान्य और गैर-एसी स्लीपर वर्ग की हैं, जिससे आम और मध्यम वर्ग के यात्रियों को बड़ी राहत मिल रही है। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे की कुल लगभग 69 लाख सीटों में से करीब 54 लाख सीटें गैर-एसी (सामान्य और स्लीपर) वर्ग की हैं, जबकि लगभग 22 प्रतिशत (15 लाख) सीटें एसी श्रेणी में हैं। रेल मंत्री ने कहा कि ट्रेनों के डिब्बों की संरचना में भी आम यात्रियों को प्राथमिकता दी गई है। वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत डिब्बे गैर-एसी (सामान्य और स्लीपर) हैं, जिनकी संख्या करीब 62 हजार है, जबकि एसी डिब्बों की संख्या लगभग 27 हजार है।
उन्होंने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारतीय रेल ने पिछले पांच वर्षों (2021-22 से फरवरी 2026 तक) में 1024 नई ट्रेनें शुरू की हैं, 907 ट्रेनों का विस्तार किया है, 168 ट्रेनों के फेरे बढ़ाए हैं और 4651 अतिरिक्त डिब्बे जोड़े हैं। मंत्री ने कहा कि कम आय और मध्यम वर्ग के यात्रियों को सस्ती यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 17,000 गैर-एसी डिब्बों के निर्माण का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सामान्य वर्ग में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में 553 करोड़ यात्रियों के मुकाबले 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 651 करोड़ हो गई है, जो इस वर्ग की बढ़ती मांग को दर्शाता है। भीड़भाड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे द्वारा त्योहारों और अवकाश के दौरान विशेष ट्रेनों का संचालन भी बढ़ाया गया है। वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) में लगभग 74,800 विशेष ट्रेन यात्राएं संचालित की गईं।
रेल मंत्री ने यह भी कहा कि मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की संरचना में सामान्य और स्लीपर वर्ग के डिब्बों की संख्या अधिक रखी जा रही है, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को सस्ती और सुलभ यात्रा का लाभ मिल सके। उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में भी यात्री सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए इसी तरह के कदम उठाए जाते रहेंगे।

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