तिलचट्टे की एक नई प्रजाति -इस नई प्रजाति का नाम ‘नियोलोबोप्टेरा पेनिनसुलारिस’ रखा गया

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विज्ञान { गहरी खोज }: भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने दक्कन प्रायद्वीप के खेती वाले इलाकों में, खासकर महाराष्ट्र के पुणे में नथाचीवाड़ी इलाके के आसपास, कॉकरोच की एक नई प्रजाति की खोज की है। इस नई प्रजाति का नाम ‘नियोलोबोप्टेरा पेनिनसुलारिस’ (Neoloboptera peninsularis) रखा गया है। ZSI ने सोमवार को एक बयान में कहा कि यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में कॉकरोच की किसी प्रजाति की पहचान करने के लिए पहली बार आधुनिक DNA तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।यह शोध ZSI के पुणे और चेन्नई केंद्रों के वैज्ञानिकों और पुणे के ‘प्रोफेसर रामकृष्ण मोरे कला, वाणिज्य और विज्ञान महाविद्यालय’ के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। उन्होंने प्रजाति की पुष्टि करने के लिए कई तरीकों को मिलाकर एक ‘एकीकृत वर्गीकरण दृष्टिकोण’ (integrative taxonomic approach) का इस्तेमाल किया। ZSI की निदेशक धृति बनर्जी ने कहा, “यह अध्ययन भारतीय कॉकरोच वर्गीकरण के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।”उन्होंने आगे कहा, “यह खोज देश में व्यवस्थित अध्ययनों के लिए एक नया मानक स्थापित करती है।” इस प्रजाति का नाम “पेनिनसुलारिस” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह प्रायद्वीपीय भारत में पाई जाती है। इस खोज से पहले, भारत में इस वंश (genus) की केवल दो प्रजातियों के बारे में जानकारी थी, जिनकी पहचान 1865 और 1995 में की गई थी। इस नई प्रजाति के जुड़ने के साथ ही, भारत में ज्ञात कॉकरोच प्रजातियों की कुल संख्या 190 तक पहुंच गई है, जो वैश्विक प्रजातियों का लगभग 3.8 प्रतिशत है।

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