अंतरराष्ट्रीय वन दिवस : 21 मार्च को मुख्यमंत्री करेंगे कार्यशाला का शुभारम्भ, जुटेंगे देश के वरिष्ठ वनाधिकारी

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  • विगत 9 वर्षों में 243 करोड़ से अधिक पौधे रोपित

लखनऊ{ गहरी खोज }: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में विगत 09 वर्षों में व्यापक जन सहभागिता व अन्तर्विभागीय समन्वय से 243 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए गए हैं। वृहद स्तर पर वृक्षारोपण, वन सुरक्षा व वन विस्तार के परिणाम स्वरूप प्रदेश के वनावरण व वृक्षावरण में वृद्धि प्राकृतवास में सुधार तथा राष्ट्रीय पशु बाघ, राष्ट्रीय धरोहर हाथी, राष्ट्रीय/जलीय जीव डॉल्फिन, राज्य पक्षी सारस व गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस 21 मार्च काे उत्तर प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयाेजित किए जा रहे हैं। वन दिवस पर उत्तर प्रदेश कैम्प द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला अरण्य समागम राष्ट्रीय वानिकी संवाद का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री 21 मार्च को प्रातः दस बजे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में कार्यशाला का शुभारम्भ करेंगे। कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि प्रदेश के वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना तथा वन राज्यमंत्री के० पी० मलिक, प्रमुख सचिव पर्यावरण, वी. हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी हैं। एक दिवसीय कार्यशाला में सम्पूर्ण देश से आये वरिष्ठ वनाधिकारी प्रतिभाग कर रहे हैं।
वन एवं अर्थव्यवस्थाएं विषयवस्तु पर आधारित कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न प्रदेशों में वानिकी के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों व अभिनव प्रयासों, वन प्रबन्ध का आधुनिकीकरण तथा डिजिटलीकरण, वन क्षेत्र के निकटवर्ती क्षेत्रों में मानव वन्यजीव संघर्ष नियंत्रित करने हेतु उपायों तथा वनीकरण व वन्यजीव संरक्षण के लिए कैम्पा से प्राप्त धनराशि का प्रभावी उपयोग विषयों पर विचार विमर्श किया जाएगा।
वन, वन्यप्राणी, वृक्ष, वेटलैण्ड्स सहित समस्त प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन के अभिन्न अंग है। हमारे वन न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है अपितु अर्थव्यवस्था तथा निर्धन, निर्बल व वंचित वर्गों के लिए आजीविका के साधन, ईंधन प्रकोष्ठ विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल तथा ईको-पर्यटन गतिविधियों के प्रमुख केन्द्र भी हैं। इन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभों के कारण वन हमारी अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ आधार भी है। इस दृष्टि से अन्तरराष्ट्रीय वन दिवस 2026 की विषयवस्तु वन एवं अर्थव्यवस्थाएँ अत्यन्त प्रासंगिक है।
वन आधारित उद्योग प्रदेशवासियों को आजीविका व रोजगार के संसाधन उपलब्ध करवा रहे हैं। हमारी सरकार द्वारा वनाधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने हेतु नियमों का सरलीकरण, कानून व्यवस्था सुदृढ़ कर उद्यमियों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध करवाने तथा वनाधारित उद्योगों को कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के परिणामस्वरूप विगत 09 वर्षों में प्रदेश में 2467 से अधिक वनाधारित उद्योग स्थापित हुए है।
प्रदेश में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के अन्तर्गत 05 जून विश्व पर्यावरण दिवस, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस तथा वन महोत्सव के अवसर पर वृक्षारोपण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण रेन वाटर हारवेस्टिंग, प्लास्टिक मुक्त परिवेश आदि विषयों पर जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाता है।
प्रदेश में व्यापक नदी पुनरोद्धार हेतु नदियों के दोनों किनारों पर एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर तथा राष्ट्रीय राज्य राजमार्ग व अन्य मार्गों पर उपयुक्त प्रजाति के पौधरोपण को प्राथमिकता दी गयी। वृक्षारोपण अभियान के अन्तर्गत विशिष्ट वनों यथा अटल वन एकलव्य वन, गोपाल वन, त्रिवेणी वन, ऑक्सी वन, शौर्य वन आदि की स्थापना की गयी। वृक्षारोपण अभियान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों नुक्कड़ नाटकों एवं संगोष्ठियों के माध्यम से पूरे प्रदेश में आम जन मानस को जोड़कर उत्सव के रूप में मनाते हुए एक जन-आन्दोलन का स्वरूप दिया जा रहा है।
कृषकों को वृक्षारोपण कार्यक्रमों से जोड़कर पौधरोपण व रोपित पौधों को संरक्षित कर व़ृक्ष का रूप धारण करने में सहयोग देने के लिए प्रेरित करने व कृषकों की आय में वृद्धि हेतु कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के माध्यम से अर्जित कार्बन क्रेडिट के लिए कृषकों को धनराशि वितरित की जा रही है। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का प्रथम राज्य है।
इसलिए मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय वन दिवसविश्व के प्रदूषित वातावरण को शुद्ध करने में वनों के अद्वितीय एवं अप्रतिम योगदान के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को मूर्त रूप देने, वनों के संरक्षण व विकास तथा वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1980 में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रत्येक वर्ष 21 मार्च, विश्व वानिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2013 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिवस को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के रूप में मनाये जाने का निर्णय लिया गया।

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