तमिलनाडु में चार-कोणीय चुनावी मुकाबला तय, विजय ने अकेले लड़ने का किया ऐलान

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चेन्नई{ गहरी खोज }: तमिलनाडु की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तस्वीर अब लगभग साफ हो गई है। राज्य में चार-कोणीय मुकाबला तय माना जा रहा है, जिससे चुनावी संघर्ष और भी दिलचस्प हो गया है। राज्य में 2019 से मजबूत स्थिति में रहे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले गठबंधन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, वाम दल, विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची, मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और मनिथनेया मक्कल कच्ची जैसे दल शामिल हैं। हाल ही में कमल हासन की मक्कल नीधि मय्यम और देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम भी इस गठबंधन में जुड़ गए हैं।
दूसरी ओर, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन किया है। इस गठबंधन में अनबुमणि रामदास के नेतृत्व वाली पट्टाली मक्कल कच्ची, टी.टी.वी. दिनाकरन की अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम और जी.के. वासन की तमिल मनीला कांग्रेस भी शामिल हैं।
इस बीच अभिनेता से नेता बने विजय की तमिलगा वेत्रि कझगम को लेकर कई अटकलें चल रही थीं। कांग्रेस के साथ उनके संभावित गठबंधन की चर्चाएं तेज थीं और यहां तक कहा गया कि राहुल गांधी से उनकी बातचीत भी हुई है। हालांकि, कांग्रेस ने अंततः द्रमुक के साथ ही अपना गठबंधन बरकरार रखा।
इसके बाद टीवीके के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने और विजय को उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश जैसी खबरें भी सामने आईं। लेकिन इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए विजय ने एक इफ्तार कार्यक्रम में साफ कर दिया कि उनकी पार्टी किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं होगी। उन्होंने घोषणा की कि टीवीके अपने दम पर सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाने का दावा भी किया। वहीं, सीमान की पार्टी नाम तमिलर कच्ची भी हर बार की तरह अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। इस प्रकार राज्य में चार प्रमुख मोर्चे बन गए हैं। उल्लेखनीय है कि द्रमुक गठबंधन 2019 से लगातार चुनाव जीतता आ रहा है, जो उसकी बड़ी ताकत मानी जा रही है। वहीं अन्नाद्रमुक पिछली हार की भरपाई के इरादे से भाजपा और सहयोगी दलों के साथ रणनीति बना रही है। सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा भले ही अभी बाकी हो, लेकिन अंदरूनी स्तर पर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। इधर, अन्य दल जहां गठबंधन में व्यस्त हैं, वहीं नाम तमिलर कच्ची पहले ही उम्मीदवारों की घोषणा कर चुनाव प्रचार शुरू कर चुकी है। पिछले लोकसभा चुनाव में करीब 8 प्रतिशत वोट शेयर मिलने से पार्टी का मनोबल भी बढ़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार के चार-कोणीय मुकाबले में किसी भी दल के लिए जीत आसान नहीं होगी, जिससे तमिलनाडु का चुनाव बेहद रोमांचक होने की संभावना है।

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