भाजपा नेता राजनाथ सिंह की जेवर एयरपोर्ट की परिकल्पना हुई साकार रूप, दुनिया के मानचित्र पर और उभरेगा नाेएडा

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वर्ष 20०1 में तत्कालीन राजनाथ सिंह की सरकार ने केंद्र काे भेजा था पहला प्रस्ताव

नोएडा{ गहरी खोज }: रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की दूरदर्शिता और परिकल्पना अब साकार होकर अब जेवर एयरपोर्ट के रूप में सामने है। वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव तत्कालीन केंद्र में अटल सरकार को भेजा था। अब इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 मार्च काे करेंगे।
वर्ष 20०1 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह जेवर क्षेत्र में एक रैली में भाग लेने आए थे। उस समय जेवर में एयरपोर्ट बनने की चर्चा चल रही थी। उसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव तत्कालीन केंद्र सरकार को भेजा था। उस समय केंद्र में भाजपा की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री थे। केंद्र सरकार ने वर्ष 2003 में एयरपोर्ट की स्थापना के लिए तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट को स्वीकार किया था।
दरअसल, यमुना किनारे बसा यह क्षेत्र कभी विकास से दूर और अभाव भरा रहा था। उसके बाद सरकार बदली तथा उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती बनी। उन्होंने भी जेवर एयरपोर्ट बनाने की बात को आगे बढ़ाया, लेकिन धीरे-धीरे यह बात फाइलों में दबती चली गई। इसके बाद 16 वर्ष तक हवाई अड्डा की फाइल धूल में दबी रही। बीच में कभी राजस्थान के भिवानी, कभी हरियाणा और कभी यूपी के फिरोजाबाद में इंटरनेशनल एयरपाेर्ट बनाने के प्रयास हुए। तत्कालीन यूपी सरकारों ने इसे जेवर से इधर-उधर ले जाने का भरपूर प्रयास किया। फिर वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आई और गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉक्टर महेश शर्मा केंद्र सरकार में मंत्री बने। उन्होंने जेवर एयरपोर्ट की स्थापना के लिए भरपूर प्रयास किया। उस समय उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी तथा सपा सरकार इसे फिरोजाबाद में बनाने की तैयारी कर रही थी। फिर समय बदला और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आई। इसके बाद दिल्ली और यूपी सरकार ने मिलकर जेवर में एयरपोर्ट बनाने की ठानी और यह सपना साकार हुआ।
बीच पूर्व में यूपीए सरकार ने यह कहकर इस परियोजना पर रोक दिया था कि यह परियोजना स्थल दिल्ली में मौजूद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय हवाई अड्डे के 72 किलोमीटर के अंदर है, जबकि आईजीआई के संचालक जीएमआर ग्रुप ने दिल्ली के मौजूदा विमान क्षेत्र के 150 किलोमीटर के अंदर एक और अंतरराष्ट्रीय विमान क्षेत्र योजना का विरोध किया था। उनका दावा था कि यह यातायात और आईजीआई के राजस्व को प्रभावित करेगा। भाजपा नेताओं काे तर्क था कि इस एयरपोर्ट के बनने से मथुरा, अलीगढ़, आगरा और वृंदावन से पर्यटक करीब एक घंटे में जेवर एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं। इससे उत्तर प्रदेश में पर्यटन और वाणिज्यिक गतिविधियों में तेजी आएगी और गौतमबुद्ध नगर में विदेशी निवेश और आने की संभावनाएं बढ़ेगी।
इस संबंध में गौतमबुद्ध नगर के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ महेश शर्मा ने कहा कि देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जेवर में विकसित हो रहा है। उद्घाटन होते ही नोएडा दुनिया के मानचित्र पर एक बार फिर से उभरेगा। यह हवाई अड्डा न केवल नोएडा बल्कि उत्तर प्रदेश और देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ही इस हवाई अड्डे की योजना तैयार की थी और भाजपा की सरकार में ही यह हवाई अड्डा बनकर तैयार हुआ। उन्होंने कहा कि अगर पूर्व की सरकारें इसको गंभीरता से लेती तो अब तक इस क्षेत्र का आमूल चूल विकास हो चुका होता। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार विकास और गरीबों के हित में काम करने को प्राथमिकता देती है। वही, जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि 28 मार्च को प्रधानमंत्री जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। इस ऐतिहासिक आयोजन को भव्य एवं उत्सव बनाने के लिए तैयारी की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि इस एयरपोर्ट का प्रथम चरण 1334 हेक्टेयर में बना है। दूसरा चरण 1365 हेक्टेयर में बनेगा, तीसरा व चौथा चरण 2054 हेक्टेयर में बनेगा। चौथा चरण तैयार होने पर इसमें पांच रनवे में तैयार होंगे। पहले चरण में इस पर 1.2 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष यात्रा कर सकते हैं, जबकि चौथा चरण पूरा होने पर 7.2 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष यात्रा कर सकते हैं।

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