गड़बड़ी रोकने बहुस्तरीय जांच की व्यवस्था बहुत जरूरी है

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सुनील दास

संपादकीय { गहरी खोज }: जिला प्रशासन मजबूत घोड़े की तरह होता है।उसे काबू में रखने के लिए लगाम कस के पकड़नी पड़ती है। उसे एहसास दिलाते रहना पड़ता है कि तुम होगे मजबूत लेकिन तुम्हारी लगाम मेरे हाथ मे हैं और तुमको वही करना है जो तुमसे कहा जाएगा।उसे बताना पड़ता है कि पूरे राज्य में कुछ भी गलत होता है तो उसे रोकना तुम्हारी जिम्मेदारी हैै। जिला प्रशासन का प्रमुख कलेक्टर होता है इसलिए गाहे ब गाहे कलेक्टर को भी बताते रहना पड़ता है कि तुम्हारे जिले मे कुछ भी गलत होता है तो उसके लिए तुम जिम्मेदार होगे। कुछ भी गलत कहीं पर हुआ है तो उसके लिए तुम दोषी हो।जिले मे कहीं भी कुछ भी गलत होगा तो तुमको बताना होगा कि यह गलत काम कैसे हुआ। इसकी खबर तुमको कैसे नहीं लगी।

विपक्ष का काम तो हर गलत काम के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराना होता है। राज्य में दुर्ग के बाद बलरामपुर में अफीम खेती का खुलासा होने पर विपक्ष ने तो ऐसी हायतौबा मचाई कि जैसे अफीम की खेती सरकार करा रही है।एक जगह अफीम की खेती खबर लगी तो विपक्ष लगाने लगा आरोप की कि सरकार धान के कटोरे को अफीम का कटोरा बना रही है।यह सच है कि सरकार तो राज्य में भाजपा की है। उससे सवाल तो पूछा जाएगा कि यह गलत काम हुआ तो कैसे हुआ।सरकार से पूछने पर सरकार मामले की जांच कराती हो ताे पता चलता है कि अफीम की खेती के मामले में चूक कहां पर हुई कि किसी को पता नहीं चला किसी खेत में अफीम की खेती की जा रही थी।

जांच में पता चला कि पटवारी,सर्वेयर व कृषि विस्तार अधिकारी की लापरवाही से दुर्ग जिले में खेती की अफीम की खेती का पता समय पर नहीं चला क्योंकि उन लोगों ने मौके पर गए बिना ही यह प्रूव कर दिया था कि वहां मक्के की फसल ली गई है।इस मामले में पहली कार्रवाई कृषि विस्तार अधिकारी को निलंबित करके की गई गई है। इसके बाद बलरामपुर जिले में अफीम की खेती का पता चलने पर वर्षों से एक ही स्थान पर जमे ५८ पटवारियों का तबादला किया गया।इन पटवारियों में अफीम की खेती वाले कुसमी पटवारी भी शामिल हैं।एक दो नहीं कई जगह अफीम की खेती होने का पता चलना पर सरकार पर आरोप लगने तो सरकार को भी इस मामले को गंभीरता से लेना पड़ा। वैसे तो अधिकारियों को एक जगह अफीम की खेती पता चलने पर खुद ही अपने स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास करना चाहिए था लेकिन राज्य में कलेक्टरों ने ऐसा नहीं किया।

दुर्ग व बलरामपुर जिले में अफीम की खेती उजागर होने पर सरकार अलर्ट हुई,सीएम साय ने कड़ा रुख अपनाय तो राजस्व विभाग ने प्रदेश भर के फार्म हाउसों व खेतों की ड्रोेन से जांच शुरू की।सभी जिलों में खेतों में ली जाने वाली फसलों की जानकारी जुटाई जा रही है।सीएम साय ने यह काम भी अच्छा किया कि प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों से अफीम की खेती की रिपोर्ट मांगी है।उन्होंने कलेक्टरों से कहा है कि वह अपने जिले में अफीम की खेती का पता लगाने के लिए सर्वे कराएं साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी जिले में अफीम की खेती न हो। उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टरों को भी इस काम के लिए १५ दिन का समय दिया है।यानी सीएम ने कलेक्टरों को यह काम करने को कहा है तब जाकर वह यह काम कर रहे हैं। कलेक्टरों को भी कभी कभी जब बताया जाता है तब जाकर वह समझते हैं कि यह उनका काम है।उनको यह काम १५ दिन मे करना है तब जाकर वह उस काम को करते हैं।

सीएम के कहने के बाद ही कलेक्टरों को यह बात समझ में आई कि अफीम की खेती नहीं होने देना है अगर कहीं होती है तो इसके लिए उनको भी जवाब देना पड़ेगा तब जाकर कलेक्टर अब ऐसा प्रयास कर रहे हैं कि उनके जिले में कम से कम अफीम की खेती न हो। इसके लिए उन्होंने अब पंचायतों में सरपंचो को टाइट कर दिया है कि अब यह तुम्हारी जिम्मेदारी है कि अपने क्षेत्र में अफीम की खेती न होने दो। कलेक्टर ने सरपंचों से कहा है कि तुमको अपने क्षेत्र की जांच पर प्रमाणपत्र देना है कि उनके क्षेत्र में अफीम की खेती नहीं हो रहीहै। पंचायत प्रतिनिधियों के साथ वनविभाग की बीट गार्ड, पटवारी अपनेअपने क्षेत्र में जांच कर पुष्टि कर रहे हैं।इनको जनपद सीईओ को रिपोर्ट सौंपनी है। अब सरकार को समझ आ रहा है कि अफीम की खेती को रोकना है तो बहुस्तरीय जांच की व्यवस्था करनी होगी और ऐसी व्यवस्था की गई है।हर क्षेत्र मे गड़बड़ी को रोकना है तो बहुस्तरीय जांच व्यवस्था होनी चाहिए तब ही जाकर कई तरह की लापरवाही व भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।

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