लव जिहाद के मामले में डीसीपी से मांगा स्पष्टीकरण, एसओ समेत दो पुलिसकर्मी निलंबित

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ग्रेटर नोएडा{ गहरी खोज }: नोएडा में कथित लव जिहाद से जुड़े एक मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद कमिश्नरेट स्तर पर सख्त कार्रवाई की गई है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इस कार्रवाई के तहत जहां एक ओर जांच के आदेश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर लापरवाही बरतने वाले दो पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया है।
जानकारी के अनुसार दिनांक 17 मार्च 2026 को थाना फेस-3 में एक महिला द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। हालांकि, मामले की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि इसमें कई महत्वपूर्ण धाराओं को शामिल नहीं किया गया था, जो इस प्रकरण की प्रकृति के अनुसार जरूरी थीं।
विशेष रूप से, उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 5(3) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) को एफआईआर में शामिल नहीं किया गया था। इन धाराओं का समावेश न किए जाने को पुलिस प्रशासन ने गंभीर लापरवाही माना है। इसके चलते डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
वहीं, एसीपी-1 सेंट्रल नोएडा उमेश यादव को इस पूरे मामले की प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा, थाना फेस-3 के प्रभारी पुनीत कुमार और मामले की विवेचक उपनिरीक्षक प्रीति गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए उचित धाराओं को शामिल नहीं किया।
पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच अब एडीसीपी नोएडा को सौंप दी गई है, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि मामले में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता की पूरी तरह से जांच हो सके और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। इस मामले को लेकर हिंदू संगठनों में भी काफी आक्रोश देखने को मिला था।
संगठनों के कार्यकर्ताओं ने थाना फेस-3 का घेराव कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस कमिश्नरेट की इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे यह संदेश दिया गया है कि कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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