आदिवासी कारीगरों को मिलेगा मंच, रीसा टाइमलेस ट्राइबल ब्रांड लॉन्च

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: आदिवासी कारीगरों को मंच देने के लिए केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने रीसा-टाइमलेस ट्राइबल नाम से ब्रांड की शुरुआत की। सुंदर नर्सरी में बुधवार को देश की आदिवासी कला और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय मंत्री जुएल ओराम ने रीसा टाइमलेस ट्राइबल नाम से एक प्रीमियम सिग्नेचर ब्रांड लॉन्च किया है। इस मौके पर केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा, एम राजामुरुगन और प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर मनीष त्रिपाठी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस मौके पर केन्द्रीय मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि रीसा ब्रांड की शुरुआत करने का उद्देश्य आदिवासी बुनाई, कढ़ाई और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाना है ताकि कारीगरों को बेहतर आमदनी और स्थायी रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि आदिवासी शिल्प को अब तक सही मूल्य नहीं मिल पाया, लोग औने पौने दाम पर आदिवासी कलाकारों के उप्ताद को खरीदते हैं, लेकिन रीसा जैसे प्लेटफॉर्म बाजार तक पहुंच और उचित लाभ सुनिश्चित करेंगे।
मंत्रालय के मुताबिक इस पहल के पहले चरण में 10 क्लस्टर शामिल किए गए हैं, जिनमें देश की प्रमुख पारंपरिक बुनाई, कढ़ाई और हस्तशिल्प को जोड़ा गया है। इनमें असम की एरी और मुगा सिल्क, लद्दाख की पश्मीना, ओडिशा की कोटपाड़ बुनाई और तमिलनाडु की टोडा कढ़ाई शामिल हैं।
इस परियोजना में कई नामी डिजाइनर भी जुड़े हैं जिनमें अबु जानी, संदीप खोसला, अंजु मोदी और गौरव जय गुप्ता सरकार ने बताया कि योजना के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण, नई डिजाइन, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और इको-फ्रेंडली पैकेजिंग की सुविधा भी दी जाएगी। यह पहल आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनकी पारंपरिक कला को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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