नव निर्माण के 9 साल: कानून-व्यवस्था मजबूत, बढ़ा भरोसा और अवसरों का विस्तार
लखनऊ{ गहरी खोज }: ‘नव निर्माण के 9 वर्ष’ पुस्तक के विमोचन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों के बदलावों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां न भय है, न तनाव और न ही दंगों का कोई खतरा। पहले जहां त्योहारों के दौरान अव्यवस्था और कर्फ्यू जैसी स्थिति बन जाती थी, वहीं अब नवरात्रि और रमजान जैसे पर्व पूरी शांति और सौहार्द के साथ मनाए जा रहे हैं। ईद और अलविदा की नमाज भी शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो रही है, जो प्रदेश में मजबूत होती सुरक्षा व्यवस्था का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परिवर्तन केवल माहौल तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की नीयत, नीति और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। प्रदेश में अब नागरिक निर्भय होकर अपने धार्मिक स्थलों पर जा रहे हैं और सामाजिक विश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव था, लेकिन अब इसे पूरी तरह बदल दिया गया है। सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले नौ वर्षों में 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं, जिनमें 2.19 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती शामिल है। इससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था को मजबूत आधार मिला है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशिक्षण क्षमता में भी व्यापक वृद्धि हुई है और अब 60,244 नए पुलिसकर्मियों को प्रदेश के भीतर ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 20 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने पुलिस सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि कमिश्नरेट प्रणाली को सात जनपदों में लागू किया गया है और प्रत्येक जिले में साइबर थानों की स्थापना की गई है।
साथ ही फॉरेंसिक साइंस लैब, स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट और स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (एसएसएफ) का गठन कर पुलिसिंग को आधुनिक बनाया गया है। पीएसी की 34 कंपनियों को पुनर्जीवित किया गया है और पहली बार तीन महिला बटालियन—वीरांगना ऊदा देवी पासी, झलकारी बाई और अवंती बाई लोधी—के नाम पर गठित की गई हैं। महिला कल्याण के क्षेत्र में भी सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1.75 लाख से अधिक बेटियों को सरकारी नौकरी मिली है और 1.10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका से जुड़ी हैं।
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत जन्म से स्नातक तक 25 हजार रुपये का सहयोग दिया जा रहा है, जबकि सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत अब तक पांच लाख बेटियों का विवाह संपन्न कराया गया है। उन्होंने बताया कि 1.06 करोड़ से अधिक परिवारों को पेंशन दी जा रही है और इसमें वृद्धि का निर्णय जल्द लिया जाएगा।
इसके अलावा युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और तकनीकी सशक्तीकरण के लिए टेबलेट वितरण जैसी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश आज बेहतर कानून-व्यवस्था, विकास और जनविश्वास का मजबूत मॉडल बनकर उभरा है।
