अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उपराष्ट्रपति ने स्वयं सहायता समूहों से किया संवाद, सशक्तिकरण पर दिया जोर

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नयी दिल्ली { गहरी खोज } : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हापानिया में इंटरनेशनल ट्रेन एंड फेयर सेंटर में महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की सदस्यों से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने जमीनी स्तर पर विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण में इन समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत में महिलाओं की भूमिका में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। देश अब केवल महिला विकास की अवधारणा से आगे बढ़कर महिला नेतृत्व वाले विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्ण ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक विकास के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है, जो देश की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में कई लखपति दीदी आगे बढ़कर करोड़पति दीदी बनेंगी, जिससे न केवल उनके परिवार बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं मेला केंद्र में लगाए गए महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का भी दौरा किया। इस दौरान उन्हें त्रिपुरा के विभिन्न जिलों से आए एसएचजी समूहों द्वारा प्रदर्शित स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प के बारे में जानकारी दी गई। उपराष्ट्रपति ने इन उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस कार्यक्रम में इंद्रसेन रेड्डी नल्लू, माणिक साहा सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने महिला स्वयं सहायता समूहों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इससे पहले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “इंटरनेशनल विमेंस डे पर हम उन महिलाओं की ताकत, हिम्मत और कामयाबियों का जश्न मनाते हैं जो हमारे परिवारों, समाज और हमारे देश की किस्मत को आकार देती रहती हैं। भारत के लंबे और शानदार इतिहास में हमारी पुरानी ज्ञान परंपराओं की रखवाली करने वाली से लेकर हमारे आजादी के आंदोलन के बहादुर नेताओं और मॉडर्न भारत की तरक्की की अगुआ तक, महिलाएं हिम्मत, समझदारी और दया की मिसाल रही हैं। आज, महिलाएं साइंस, एजुकेशन, एंटरप्रेन्योरशिप, गवर्नेंस, डिफेंस, स्पोर्ट्स और स्पेस जैसे हर क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रही हैं, और भारत को एक मज़बूत, सबको साथ लेकर चलने वाला और डेवलप्ड देश बनाने की दिशा में बहुत बड़ा योगदान दे रही हैं। हम एक ऐसा समाज बनाते रहें जहां हर लड़की आज़ादी से सपने देख सके और हर महिला अपनी पूरी काबिलियत को पहचान सके। इंटरनेशनल विमेंस डे पर सभी महिलाओं को दिल से बधाई और शुभकामनाएं।”

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