भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर राजनाथ सिंह ने जताई चिंता

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कोलकाता{ गहरी खोज }: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण उत्पन्न अस्थिरता के खतरे अब धीरे-धीरे नया सामान्य बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “भूमि, समुद्र और आकाश के साथ-साथ अंतरिक्ष तक में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चिंता का विषय है। उन्होंने विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका, इसरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियां वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रभाव डालती हैं।
कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प संगोष्ठी’ में शुक्रवार को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होता है तो उसका सीधा असर पूरी दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में वर्तमान घटनाक्रम असामान्य हैं और यह कहना अभी कठिन है कि यह संकट आगे किस दिशा में जाएगा। इसके बावजूद उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत समुद्री क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभाने में सक्षम है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में आपूर्ति शृंखला में व्यवधान से बचने का एकमात्र रास्ता आत्मनिर्भरता है। उन्होंने कहा कि देश के रक्षा क्षेत्र में उच्च स्तरीय और सटीक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है और आत्मनिर्भरता की दिशा में रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक उपक्रम कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य भारत को जहाज निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल करना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में महासागर एक बार फिर शक्ति संतुलन के केंद्र में आ गए हैं और ऐसे में एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में भारत को स्पष्ट दृष्टि, क्षमता और आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व करना होगा।

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