केजरीवाल व सिसोदिया बरी

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kejriwal
  • इरविन खन्ना
    संपादकीय { गहरी खोज }:
    स्पेशल जज जितेन्द्र सिंह ने शराब घोटाला मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को बरी करते हुए माननीय जज ने कहा कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं और उसमें लगाए आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते। चार्जशीट में विरोधाभास है अदालत ने सीबीआई जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। शराब घोटाला जो दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले बहुत चर्चा में रहा और इस कारण आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल की व्यक्तिगत साख व छवि को धूमिल करने के साथ-साथ पार्टी की छवि भी कमजोर हुई। अब फैसला आने के बाद केजरीवाल का कहना है कि ‘आज कोर्ट ने सारे आरोप खारिज कर दिए और हम सबको डिस्चार्ज कर दिया। हम हमेशा कहते थे कि हमें भारतीय न्याय प्रणाली पर भरोसा है। मैं जज साहब का बहुत-बहुत शुक्रिया करता हूँ, जिन्होंने हमारे साथ न्याय किया। सत्य की जीत हुई। भगवान हमारे साथ है। मोदी जी और अमित शाह जी ने मिलकर आजाद भारत का यह सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा। आम आदमी पार्टी को खत्म करने के लिए आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े पांच नेताओं को जेल में डाल दिया। आज तक आजाद भारत के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ। सिटिंग चीफ मिनिस्टर को घर से घसीटकर जेल में डाला गया और छह महीने तक जेल में रखा गया। हमारे उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जी को दो साल तक जेल में रखा गया। हमारे ऊपर कीचड़ फेंका गया। 24 घंटे टीवी चैनलों पर डिबेट चलती थी, खबरें दिखाई जाती थी कि…मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है। इन्होंने झूठा केस लगाया। आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल कट्टर ईमानदार है। मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार है, आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार है। मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि सत्ता के लिए इस तरह से खिलवाड़ मत कीजिए देश के साथ। इस तरह से संविधान के साथ खिलवाड़ मत कीजिए। आपको सत्ता चाहिए, अच्छे काम कीजिए। आज देश के सामने कितनी बड़ी समस्याएं है। महंगाई है, बेरोजगारी है, पूरे देश में सड़कें टूटी पड़ी हैं, चारों तरफ पॉल्यूशन ही पॉल्यूशन है, चारों तरफ देश में इतनी समस्याएं है उनका समाधान करके सत्ता में आइए न। केजरीवाल पर आम आदमी पार्टी पर झूठे केस क्यों करते हैं। अच्छा काम करके सत्ता में आइए। इस तरह के झूठे केस करना और चौबीस घंटे विपक्षियों पर ऊटपटांग झूठे केस करना उन्हें जेल में डालना ये प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता। इससे देश आगे नहीं बढ़ता। देश तब आगे बढ़ेगा, जब जनता की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।’ वहीं, कोर्ट के फैसले पर मनीष सिसोदिया ने कहा- हमें एक बार फिर गर्व हो रहा है अपने संविधान पर और बी. आर. अंबेडकर पर, जिन्होंने हमें ऐसा संविधान दिया। सच की फिर से जीत हुई है।
    सारे मामले को लेकर जो टिप्पणियां न्यायालय ने कीं वह बहुत गंभीर हैं, वह आप सम्मुख रख रहा हूं। आबकारी नीति के निर्माण में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा नहीं थी। अभियोजन पक्ष (सीबीआई) का मामला न्यायिक जांच पर खरा नहीं उतरता। सीबीआई ने साजिश की एक कहानी गढ़ने की कोशिश की, लेकिन उसका सिद्धांत ठोस साक्ष्यों के बजाय मात्र अनुमान पर आधारित था। केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया। जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सबूतों के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह को बरी करते हुए जज कि हैरानी की बात है कि उन्हें पहला आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री नहीं थी। सिसोदिया पर आरोप था कि वे शराब नीति बनाने और लागू करने के जिम्मेदार थे, लेकिन अदालत ने कहा कि उनके शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी हुई।
    सीबीआई का कहना है कि निचली कोर्ट के आदेश के विरुद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। सीबीआई को अपील करने का पूरा हक है, लेकिन न्यायालय ने जो निर्णय दिया है उससे सीबीआई ही आज कटघरे में खड़ी दिखाई दी। न्यायालय ने जो टिप्पणियां की हैं वह सीबीआई की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा रही हैं वहीं यह जन-साधारण के लिए चिंता का भी विषय है। एक लोकतांत्रिक देश में अगर सरकारी एजेंसियां संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज सकती है तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी? इस मामले में अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है लेकिन जो कुछ अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया व उनके साथियों के साथ आज तक हुआ क्या उसकी भरपाई हो सकती है? आज यह प्रश्न उत्तर मांग रहा है।

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