एपीजे स्कूल विवाद और नॉर्थ ईस्ट छात्राओं के मामले पर आआपा का सरकार पर हमला

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी और एपीजे स्कूल से जुड़े विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी (आआपा) के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बुधवार को दिल्ली सरकार और मीडिया पर तीखा हमला बोला। सौरभ भारद्वाज ने पार्टी कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि अभिभावकों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें अखबार पर एकतरफा, अप्रमाणित और भ्रामक खबर प्रकाशित करने का आरोप लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि अभिभावको ने नोटिस में आरोप लगाया गया है कि अखबार ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षा मंत्री का पक्ष तो छापा, लेकिन प्रभावित अभिभावकों से संपर्क तक नहीं किया। अभिभावकों का दावा है कि वे उच्च न्यायालय के 2020 के आदेश के अनुसार तय फीस चेक के माध्यम से जमा कर रहे थे, लेकिन स्कूल ने वे चेक स्वीकार नहीं किए।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि फीस विवाद के कारण बच्चों को सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के एडमिट कार्ड नहीं दिए गए। अभिभावक इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी पहुंचे, जहां 16 फरवरी को कथित रूप से बच्चों के पक्ष में आदेश दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि एपीजे स्कूल ने 2020 में फीस बढ़ोतरी के लिए शिक्षा विभाग के एक संविदा कर्मचारी के जरिए फर्जी ई-मेल से मंजूरी दिखाई थी। मामला जब दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंचा तो न्यायालय ने स्कूल को फटकार लगाई और मुख्य सचिव को एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल अलग-अलग मदों में मनमानी फीस वसूल रहे हैं। काउंसलिंग फीस, बिल्डिंग फंड, अनिवार्य रूप से स्कूल से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने की शर्त, एसी शुल्क आदि। उन्होंने कहा कि एक बार बच्चे का दाखिला हो जाए तो अभिभावक 14 साल तक बंधुआ बन जाते हैं। दिल्ली में अरुणाचल प्रदेश की छात्राओं से कथित दुर्व्यवहार के मामले में उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज होने के बावजूद आरोपित को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया। सुल्तानपुरी फ्लाईओवर में 18 साल की देरी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने एलजी विनय कुमार सक्सेना पर तंज कसा। साथ ही एमसीडी पर आवारा गायों और मृत बछड़ों के मामले में लापरवाही का आरोप लगाया। अंत में आआपा प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अभिभावकों की कानूनी लड़ाई जारी रहेगी और सरकार व स्कूल प्रबंधन की “मिलीभगत” को अदालत में चुनौती दी जाएगी।

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