दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करने की मांग, भाजपा सांसद ने लिखा अमित शाह और रेखा गुप्ता को पत्र

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: भारतीय जनता पार्टी के चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखा है। खंडेलवाल ने बुधवार को अपने पत्र में कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है और उसकी राष्ट्रीय राजधानी का नाम भी उसके गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए। उन्होंने एक अन्य पत्र में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से दिल्ली विधानसभा में दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करने का अनुरोध किया है।
खंडेलवाल ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और दीर्घकालिक सभ्यतागत परंपराएं यह स्थापित करती हैं कि वर्तमान दिल्ली ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थल है, जो पांडवों द्वारा स्थापित भव्य राजधानी थी, जैसा कि महाकाव्य महाभारत में वर्णित है। महाभारत में इंद्रप्रस्थ को यमुना नदी के तट पर बसा एक समृद्ध और भव्य नगर बताया गया है, जो आज की दिल्ली के भौगोलिक स्वरूप से पूरी तरह मेल खाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा पुराना किला में की गई खुदाई में लगभग 1000 ईसा पूर्व के प्राचीन बसावट के प्रमाण मिले हैं, जिनमें पेंटेड ग्रे वेयर (पीजीडब्लू) संस्कृति के अवशेष भी शामिल हैं, जिन्हें महाभारत काल से जोड़ा जाता है। उनके अनुसार ये खोज इस ऐतिहासिक धारणा को मजबूत करती हैं कि प्राचीन इंद्रप्रस्थ इसी स्थान पर स्थित था जहां आज दिल्ली है।
खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली नाम अपेक्षाकृत बाद के मध्यकालीन दौर में प्रचलन में आया, जिसे इतिहासकार ढिल्लिका या देहली जैसे नामों से जोड़ते हैं, लेकिन यह इसकी मूल और प्राचीन सभ्यतागत पहचान का प्रतिनिधित्व नहीं करता। इंद्रप्रस्थ राजधानी की मूल सभ्यतागत पहचान का प्रतीक है। राजधानी का नाम इंद्रप्रस्थ करना भारत की प्राचीन विरासत से उसके संबंध को पुनर्स्थापित करेगा और भारत की सांस्कृतिक निरंतरता को मजबूत करेगा।
खंडेलवाल ने कहा कि भारत में कई शहरों के ऐतिहासिक नाम पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और प्रयागराज प्रमुख उदाहरण हैं। इंद्रप्रस्थ नाम पहले से ही दिल्ली के कई प्रमुख संस्थानों और स्थानों में प्रचलित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस ऐतिहासिक नाम को समाज में स्वाभाविक स्वीकृति प्राप्त है। खंडेलवाल ने गृहमंत्री शाह से आग्रह किया कि इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और अन्य विशेषज्ञों से परामर्श कर इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाए।

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