केंद्र का हिस्सा सीधे किसान के खाते में जाएगाः शिवराज चौहान

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  • तीन दिवसीय राष्ट्रीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का शिवराज चौहान ने किया शुभारंभ

नई दिल्ली{ गहरी खोज }: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेती-किसानी को “विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में ले जाने वाले कई बड़े कृषि सुधारों का रोडमैप सामने रखा। उन्होंने साफ संदेश दिया कि अब किसान का पैसा रोक कर रखने की पुरानी व्यवस्था नहीं चलेगी, एमएसपी खरीदी से लेकर केसीसी लोन, पेस्टिसाइड लाइसेंस और केवीके की भूमिका तक हर स्तर पर पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही तय की जाएगी।
बुधवार को पूसा स्थित आईसीएआर–आईएआरआई परिसर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित पूसा कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पौधारोपण कर किया। इस अवसर पर भारत सरकार के कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एम. एल. जाट और आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सात किसानों को आईएआरआई कृषि अध्येता पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिससे “किसान प्रथम” की भावना को और बल मिला। कृषि रिफॉर्म्स पर अपनी बात रखते हुए शिवराज चौहान ने सबसे पहले किसानों के बकाया भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो भी एजेंसी या राज्य सरकार किसानों का पैसा रोकेगी, उसे उस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसान को देर से भुगतान और सरकारी खातों में पैसा “पार्क” रखकर लाभ कमाने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अपनी ओर से देरी नहीं करेगी और यदि किसी योजना में राज्यों की ओर से भुगतान में विलंब होता है तो भी केंद्र का हिस्सा सीधे किसान के खाते में भेजने के विकल्प पर काम किया जा रहा है। उनका संदेश था कि किसान को कम से कम केंद्र की ओर से मिलने वाला लाभ समय पर और बिना अड़चन के पहुँचे।
कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप, स्प्रिंकलर, पाली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी तकनीकों के लिए दी जा रही सहायता का ज़िक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को 18 से अधिक योजनाओं के तहत संसाधन उपलब्ध करा रही है लेकिन केवल पैसा भेज देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि एक जिले में 700 किसानों की सूची में नाम होने के बावजूद 158 किसानों को मशीनें मिली ही नहीं। उन्होंने कहा कि जब केंद्र पैसा देता है तो यह भी देखना उसकी जिम्मेदारी है कि लाभ असली किसान तक पहुँचा या नहीं और इसके लिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम एक जरूरी रिफॉर्म है।

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