कैमिकल फैक्टरी में धमाका

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  • इरविन खन्ना
    संपादकीय { गहरी खोज }:
    राजस्थान के भिवाड़ी की कैमिकल फैक्टरी में अचानक हुए तेज धमाके में 8 मजदूर जिंदा जल गए, जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें दिल्ली एम्स रैफर किया गया है। शव बुरी तरह जल गए थे। कई शवों के कंकाल भर बचे थे। बॉडी पार्ट्स के टुकड़े बिखरे मिले। रेस्क्यू टीम ने इन टुकड़ों को पॉलीथीन में इकट्ठा किया। हादसा खुशखेड़ा कारौली इंडस्ट्रियल एरिया में सोमवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे हुआ। फैक्टरी मैनेजर अभिनंदन को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। फैक्टरी को सील कर दिया है। इस फैक्टरी में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। मौके से बारूद, पटाखे और पैकिंग के डिब्बे मिले हैं। घटना के समय करीब 25 मजदूर काम कर रहे थे। कलेक्टर अर्तिका शुक्ला ने कहा-देखकर लग रहा है किEdit Edit modified date and timeछोटा एक्सप्लोसिव मटेरियल था। गैस रिसाव नहीं था। ए.डी.एम. सुमिता मिश्रा के अनुसार, फैक्ट्री मालिक का नाम राजेंद्र है। उन्होंने किसी तिवारी को यह फैक्टरी लीज पर दी थी। कैमिकल फैक्टरी में हुए धमाकों में मजदूरों के चिथड़ों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन के भी चिथड़े उड़े हैं। सरकार ने फैक्टरी के मैनेजर को तो हिरासत में ले लिया लेकिन जिन अधिकारियों के नाक के नीचे पटाखों की यह अवैध फैक्टरी चल रही थी, उनके प्रति सरकार की चुप्पी चिंताजनक है। उद्योगिक क्षेत्र से उद्योग विभाग का सीधा संबंध होता है। हर उद्योग में क्या बन रहा होता है और कितने लोग वहां काम करते हैं उस बारे उनको सारी जानकारी होती है। धरातल का सत्य यह है कि उद्योग लगने से पहले सारी जानकारी देना उद्योगपति का कर्तव्य होता है। जानकारी ठीक है या गलत इसको उद्योग विभाग के अधिकारी देखते हैं, उनकी जांच के बाद ही उद्योग में उत्पादन शुरू होता है। करीब-करीब यह नियम सारे देश में लागू हैं, लेकिन यह सब करने की जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की ही होती है। इस जिम्मेवारी को निभाने में प्रदेश सरकार असफल रही है। राजस्थान सरकार की कैमिकल फैक्टरी में धमाके में 8 लोगों के जिंदा जल जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए उद्योग विभाग या संबंधित अन्य विभाग के अधिकारियों पर जिनकी जिम्मेवारी उद्योग पर नजर रखने की थी, उन पर भी फैक्टरी मैनेजर की तरह कार्रवाई करने की आवश्यकता है। क्योंकि उनकी लापरवाही भी धमाके का एक बड़ा कारण है। ऐसी दुःखदाई घटना भविष्य में न हो इस बात को सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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