आर्थिक सर्वेक्षण से सरकार की सफलता का पता चलता है
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: हर बजट के पहले सरकार आर्थिक सर्वेक्षण पेश करती है ताकि राज्य के लोगों को पता चले कि सरकार ने पिछले एक साल क्या कुछ किया है, क्या कुछ बेहतर किया है।उससे राज्य का विकास पहले से ज्यादा हुआ है या नहीं, उससे लोगों की आय पहले से ज्यादा बढ़ी है या नहीं। हर क्षेत्र की विकास दर पहले से ज्यादा हुई है या नहीं। लोगों को जीवन स्तर और ऊंचा उठा है या नहीं। लोगों को पहले से ज्यादा सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। इस हिसाब से देखा जाए तो छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है,इससे राज्य के लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरी है।राज्य की जीडीपी बढ़ी है, इससे पता चलता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत है।राज्य निरंतर आर्थिक प्रगति,संरचनात्मक सुधार के साथ समावेशी विकास पथ पर अग्रसर है।कृषि,उद्योग व सेवा क्षेत्र का संतुलित विकास हो रहा है।राजकोषीय अनुशासन,बुनियादी ढांचे के विस्तार और डिजिटल शासन से विकास की गति पहले की अपेक्षा तेज हुई है।
विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था पहले से मजबूत है। इससे राज्य के सामने अर्थव्यवस्था की एक सकारात्मक तस्वीर पेश हुई है।वर्ष २५-२६ में जीएसडीपी ११.५७ प्रतिशत बढ़कर ६.११ लाख करोड़ पहुंचने के संकेत हैं।छत्तीसगढ़ में पिछले साल की तुलना में प्रति व्यक्ति आय में १०.०७ प्रतिशत की वृध्दि हुई है। इससे प्रति व्यक्ति आय १ लाख ६२ हजार ८७० रुपए से बढ़कर १ लाख ७९ हजार २४४ रुपए होने का अनुमान है।पुराने आंकड़ों को देखा जाए तो राज्य में हर साल प्रति व्यक्ति आय बढ़ती रही है।यह २०-२१ में १ लाख ६ हजार ११७ रुपए थी तो इस हिसाब से देखा जाए तो साय सरकार के समय भी हर साल प्रति आय बढ़ रही है और इससे साफ है कि राज्य में लोगों को राेजगार भी मिल रहा है तथा सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ भी मिल रहा है।
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक राज्य की जीडीपी प्रचलित भावों पर वर्ष २४-२५ में ५ लाख ६५ हजार ८८५ करोड़ रुपए से बढ़कर ६ लाख ३१ हजार २९१ करोड़ रुपए होने का अनुमान है।जो पिछले साल की तुलना में ११.५७ प्रतिशत की वृद्दि दर्शाता है। वहीं स्थिर भाव में ८.११ प्रतिशत वृध्दि होने का अऩुमान है। इससे पता चलता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि,उद्याेग व सेवा क्षेत्र में तेज वृध्दि का अनुमान है।कृषि क्षेत्र में २०२५-२६ में१२.५३ प्रतिशत वृध्दि का अनुमान है।इसी तरह उद्योग क्षेत्र में १०.२६ प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में १३.१५ प्रतिशत बृध्दि होने का अनुमान है। इस तरह देखा जाए तो तीनों क्षेत्र में पिछले साल की तुलना में ज्यादा वृध्दि होने का अऩुमान है। वित्त मंत्री ओपी चौैधरी का कहना है कि तीनों क्षेत्र की जीडीपी में वृध्दि दो अंकों में हुई है।जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान उद्योग क्षेत्र से अधिक होना राज्य के विकास के लिए अच्छा है।
बजट का मतलब होता है कि राज्य के लोगों के लिए बेहतर से बेहतर काम करना। राज्य के लोगों के लिए बेहतर योजनाएं बनाना, उन पर बेहतर अमल करना, लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे सुनिश्चित करना। राज्य के लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना, उसका लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिले सुनिश्चित करना। बजट में योजनाओं व सुविधाओं के लिए पैसे दिए जाते हैं। पैसे खर्च किए जाते हैं। हर साल ज्यादा सुविधा दी जाती है, लोगों को योजनाओं का लाभ दिया जाता है इससे खर्च बढ़ता है, खर्च बढ़ने से बजट भी हर साल बढ़ता है, जब भी खर्च बढ़ता है तो राज्य में भ्रष्टाचार भी बढ़ता है। जितना बजट बढ़ता जाता है, उतना खर्च बढ़ता है तो उतना ही ज्यादा भ्रष्टाचार भी बढ़ता है। यदि सरकार भ्रष्टाचार पर रोक लगाने वाली नहीं होती है तो हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार कैसे होता है राज्य के लोगों ने पिछली सरकार के समय देखा है।
बजट तो हर साल बढ़ना ही है, इससे राज्य में भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा ऐसे में सरकार को भ्रष्टाचार रोकने के लिए ज्यादा सजग होना पड़ेगा। क्योंकि पिछले साल पांच साल में राज्य तंत्र में भ्रष्टाचार का ऐसा रोग लगा है कि उसे खत्म करना साय सरकार के लिए चुनौती है। साय सरकार सुधारों के जरिए भ्रष्टाचार को कम करने का प्रयास कर रही है। यह बहुत अच्छी बात है, सरकार की नीति व नीयत जब भ्रष्टाचार रोकने की होती है तो बजट के पैसों का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग संभव होता है। राज्य के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलती है, योजनाओं का लाभ नियमित मिलता है।इससे राज्य के लोगों की आय बढ़ती है, राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, राज्य के लोगों के जीवन स्तर ऊंचा होता है। बजट का मकसद भी यही होता है पिछले बजट से राज्य सरकार अपने मकसद को पाने में सफल रही है तो उम्मीद की जा सकती है इस बार भी ऐसा होगा।
