गलती के बाद गलती कर रहे हैं राहुल गांधी
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: लोकतंत्र में कई मामलो में सही उसे ही माना जाता है जिसे बहुमत सही कहता है और गलत उसी माना जााता है जिसे बहुमत गलत कहता है। लोकतंत्र में सही और गलत की एक ही कसौटी होती है वह है बहुमत। इसलिए लोकतंंत्र में जिनका यकीन होता है वह सही और गलत की इसी कसौटी का अंतिम कसौटी मानते हैं। बहुमत ने कह दिया कि यह गलत है तो वह लोकंतत्र में गलत ही माना जाएगा। कांग्रेेस ने एआई ग्लोबल समिट में अपने युवा कांग्रेस के नेताओं को अर्धनग्न प्रदर्शन के लिए भेजकर ऐसा काम किया है जिसे कोई सही नही मान रहा है, विपक्षी गठबंधन के नेता भी उसे गलत मान रहे हैं। देश की जनता भी उसे गलत मान रही है, उसे गलत कह रही है। गुस्से में दिल्ली के भारत मंडपम में प्रदर्शन करने आए युका नेताओं की पिटाई भी की।
राहुल गांधी की कांग्रेस उसे सही ठहरा रही है क्योंकि गलती तो हो चुकी है और इसके लिए राहुल गांधी को दोषी माना जा रहा है। क्योंकि राहुल गांधी कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं, कांग्रेस में उनकी मर्जी के बिना पत्ता नहीं हिलता है तो इतना गंदा व शर्मनाक प्रदर्शन उनकी मर्जी के बिना हो नहीं सकता।सीधा मतलब है कि यह काम योजना बनाकर किया गया है तो इसकी अनुमति राहुल गांधी से ली गई होगी और राहुल गांधी की अनुमति के बाद यह शर्मनाक काम किया गया है। देश की छबि को वैश्विक स्तर पर धूमिल करने का प्रयास किया गया। पूरा देश जानता है कि राहुल गांधी देश को बरसों से विदेश में बदनाम करते रहे हैं,वह कहते रहे हैं कि देश में लोकतंत्र नहीं हैं, देश में संविधान खतरे में है।देश का चुनाव आयोग ने मोदी सरकार के इशारे पर काम करता है। सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्र नहीं रह गया है, मीडिया मोदी के इशारे पर खबरें चलाता है. पत्रकार भाजपाई हो गए हैं।इस बार भी उनकी अनुमति से ही युवक कांग्रेस नेताओं ने देश की छबि दुनिया में खराब करने का प्रयास किया है।
कोई भी राजनीतिक दल कोई काम जब सोच विचार कर करता है तो वह यही सोचकर करता है कि इससे उसको राजनीतिक रूप से लाभ होगा। एआई ग्लोबल समिट मे शर्मनाक प्रदर्शन करने का फैसला भी बहुत सोचसमझ कर लिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि इससे कांग्रेस को क्या राजनीतिक फायदा हुआ है या हो सकता है। कांग्रेस के इस शर्मनाक प्रदर्शन पर सारे राजनीतिक दलो,देश की जनता की तरफ से जो प्रतिक्रिया आई है, उससे तो ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने तो बहुत बड़ी राजनीतिक गलती कर दी और इस गलती की वजह से वह पूरे देश में अकेली हो गई है कोई राजनीतिक दल उसके साथ खड़े होने को तैयार नहीं है। क्योंकि आने वाले समय में कुछ राज्यों मे चुनाव है,ऐसे में कांग्रेस के साथ खड़े होने का मतलब है कि कांग्रेस की गलती को सही मानना है।जो भी युवा कांग्रेस के शर्मनाक गलती को सही मानेगा उसे चुनाव में राजनीतिक नुकसान होगा। इसलिए कोई राजनीतिक दल कांग्रेस के साथ खड़े न होकर उसकी गलती की गलती बता रहा है और खुद को कांग्रेस से अलग बता रहा है। वह देश को बता रहा है कि कांग्रेस की जैसी सोच है,हमारी सोच वैसी नहीं है।
एआई ग्लोबल समिट कुछ कमियों के बाद भी एक ऐतिहासिक आयोजन साबित हुआ है। दुनिया के तमाम बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष, पीएम, बड़ी एआई कंपनियाें को सीईओ आए थे और सबने भारत की एआई के लिए की गई पहल का स्वागत किया और एआई के क्षेत्र में भारत पर भरोसा कर २५ लाख करोड़ रुपए निवेश करने की घेोषणा की है, यह बहुत बडी़ बात है। इसी से साबित होता है कि यह आयोजन पूरी तरह अपने मकसद मे सफल रहा है. पीएम मोदी का कद तो वैसे ही ग्लोबल तौर पर ऊंचा है, इस आयोजन से उनका कद और ऊंचा हुआ है तथा वह ग्लोबल साउथ के एकमात्र बड़े नेता के तौर पर उभर कर आए है, ऐसे नेता के तौर पर उभर कर आए है जिस पर दुनिया के ज्यादातर देश भरोसा करते हैं और मानते हैं कि पीए मोदी के साथ रहने से उनके देश को फायदा होगा।
पीएम मोदी ने एआई को यह कहकर नई दिशा दी है कि इसे लोकतांत्रिक बनाकर इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाना चाहिए। पीएम मोदी की इस सोच की सभी लाेकतांत्रिक ताकतों ने सराहना की है। इससे लोकतांत्रिक नेता के रूप मे उनका कद और ऊंचा हुआ है, यही बात राहुल गांधी को सबसे ज्यादा नागवार गुजरी और उन्होंने समिट और मोदी को असफल करने के लिए युकां को शर्मनाक प्रदर्शन करने भेजा इससे मोदी का कद तो छोटा नहीं हुआ है राहुल गांधी का कद मोदी के सामने और छोटा हो गया है तथा अब कोई भी उन्हें मोदी का विकल्प तो मान ही नहीं सकता। गलती के बाद गलती करके राहुल गांधी कांग्रेस और अपना राजनीतिक नुकसान कर रहे हैं। उनके इसी तरह के कई कामों के कारण यह कहा जाता है कि वह देश के लिए हानिकारक है। कांग्रेस के लिए भी हानिकारक हैं।
