एआई गवर्नेंस प्रगति पर ब्रेक नहीं, बल्कि समाधान का एक्सीलरेटर है : यूएन महासचिव

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: दिल्ली स्थित भारत मण्डपम में आयाेजित एआई शिखर सम्मेलन में शुक्रवार काे संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि विज्ञान आधारित एआई गवर्नेंस प्रगति पर ब्रेक नहीं, बल्कि समाधान का एक्सीलरेटर है। उन्होंने आगाह किया कि यदि एआई के लिए साझा वैश्विक मानक नहीं बने, तो दुनिया भर में नियमों का “पैचवर्क” तैयार हो जाएगा, जिससे लागत बढ़ेगी, सुरक्षा कमजोर होगी और असमानताएं गहरी होंगी।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने कहा कि स्पष्ट और भरोसा पैदा करने वाले नियम व्यवसायों को दिशा देते हैं, जिससे नवाचार सही रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ सकता है। विज्ञान आधारित शासन प्रगति को रोकता नहीं है, बल्कि उसे अधिक सुरक्षित, निष्पक्ष और व्यापक रूप से साझा करने योग्य बनाता है।
एंटोनियो गुटेरेस जोर देकर कहा कि एआई के प्रभाव बच्चों की सुरक्षा, श्रम बाजार में बदलाव और बड़े पैमाने पर हेरफेर जैसे जोखिम का समय रहते आकलन जरूरी है, ताकि देश अपने नागरिकों को तैयार कर सकें, उनकी रक्षा कर सकें और उनमें निवेश कर सकें।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने यह भी कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय सहयोग चुनौतीपूर्ण है, विश्वास कमजोर हुआ है और तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में असंगत नीतियां और तकनीकी मानक लागू हैं। नियमों में इस तरह की असमानता से लागत बढ़ेगी, सुरक्षा कमजोर होगी और वैश्विक विभाजन गहरा होगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि साझा बेंचमार्क तय हों, तो दिल्ली का कोई स्टार्टअप भी वैश्विक स्तर पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है और सुरक्षा मानक तकनीक के साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। विज्ञान मार्गदर्शन देता है, लेकिन निर्णय इंसान लेते हैं। उन्होंने उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों न्याय, स्वास्थ्य सेवाएं और ऋण में सार्थक मानवीय निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया। लोगों को यह समझने और चुनौती देने का अधिकार होना चाहिए कि निर्णय कैसे लिए गए।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि कम प्रचार, कम भय और अधिक तथ्य व सबूत। विज्ञान के मार्गदर्शन में एआई को अनिश्चितता के स्रोत से सतत विकास लक्ष्यों के लिए एक विश्वसनीय इंजन में बदला जा सकता है। उन्होंने ऐसी नीतियां बनाने का आह्वान किया जो उतनी ही स्मार्ट हों, जितनी तकनीक जिसे वे दिशा देना चाहती हैं।

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