मैला ढोना मंजूर किया..पर धर्म नहीं बदला : संत उमेश गिरी
युवाओं को आह्वान- सनातन की शक्ति को करंट की तरह छूकर महसूस करने की जरूरत
जोधपुर{ गहरी खोज }: मध्यप्रदेश के राज्यसभा सांसद और प्रख्यात संत उमेश गिरी महाराज ने कहा सनातन की शक्ति को करंट की तरह छूकर महसूस करने की जरूरत है। वे गुरुवार को जोधपुर प्रवास पर थे। सर्किट हाउस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने सनातन धर्म की शक्ति, धर्मांतरण के बढ़ते खतरे और पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण पर बेबाकी से अपनी राय रखी।
उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर कहा कि आजकल धन, संपत्ति और जमीन का लोभ देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है, जो महज दबाव और लालच का विषय है। उन्होंने वाल्मीकि समाज का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे देश में वाल्मीकि समाज के लोगों ने मुस्लिम शासन में पायखाने साफ करना और सिर पर मैला ढोना स्वीकार कर लिया, लेकिन अपना धर्म नहीं बदला। उन्होंने ही सनातन धर्म को बचाए रखा है। जो लोग लोभ-लालच में आकर धर्म बदल रहे हैं, वे कभी सनातन की शक्ति को समझ नहीं पाएंगे।
सांसद ने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता का आकर्षण क्षणिक है। उन्होंने एक अनूठा उदाहरण देते हुए कहा, जैसे हम अर्थी और करंट को छूकर देखते हैं, वैसे ही प्रत्येक भारतीय को सनातन की पावर को छूकर देखना चाहिए। जब आप इसमें प्रवेश करेंगे, तभी आपकी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक व्यवस्था सुदृढ़ हो पाएगी। घर वापसी के सवाल पर संत ने कहा कि अगर कोई अपनी मर्जी से गया है और वापस आना चाहता है, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका रिटर्न होना हमारे लिए बहुत ज्यादा लाभदायक नहीं है, क्योंकि हम अपनी जगह पर बहुत मजबूती से खड़े हैं। हमारी परंपरा तो दो रोटी में से एक गाय-कुत्ते को देने की है, हम स्वाभिमानी हैं। अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना पर उन्होंने कहा कि अब देश का हर गांव और शहर अयोध्या बन गया है। लोगों का मन राममय है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से जो मर्यादा का सूत्र दिया, रामजी ने उसे जीकर दिखाया। आज के दौर में युवाओं को उसी मर्यादित क्षेत्र में रहने की आवश्यकता है।
