फिर भूपेन ने वही किया जो हिमंता ने किया था

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
असम में कांग्रेस के इतिहास में फिर वही होने वाला है जो एक बार हो गया है।फिर भूपेन वही करने वाले हैं जो हिमंता शरमा कर चुके हैं। यानी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने का फैसला। इससे साफ हो जाता है कि असम कांग्रेस के नेता व दिल्ली कांग्रेस के नेता एक बार हुई गलती से कोई सबक नहीं लेते हैं,वह वही गलती फिर से करते हैं जिस गलती के कारण कांग्रेस को असम में ऐसा नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई कांग्रेस आज तक नहीं कर पाई है। इसके लिए असम कांग्रेस के कई नेता जितने जिम्मेदार है, उतने ही जिम्मेदार राहुल गांधी और उनके आसपास रहने वाले नेता भी हैं।अपनी पार्टी का एक वरिष्ठ व जनाधार वाला नेता क्या चाहता है, सम्मान चाहता है। वह चाहता है कि उसे जो अधिकार दिया गया है, उस हिसाब से उसको फैसला करने दिया जाए। वह पार्टी काे आगाह करे कि इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है तो उसकी बात को गंभीरता से लिया जाए।

ऐसा भी नहीं है कि हिमंता की तरह भूपेन बोरा ने आलाकमान को बताया न हो कि असम में पार्टी हित में क्या किया जाना चाहिए। पहली बार दिल्ली में हिमंता को लगा कि उनका अपमान किया गया है तो उन्होंने अपमान के कारण ही कांग्रेस छोड़ने का और भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। अब भूपेन वोरा को भी वही एहसास हो रहा है कि कांग्रेस में उनका सम्मान नहीं किया जा रहा है। राहुल गांधी से बात होने के बाद भी भूपेन बोरा ने यदि कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया है तो इसका मतलब साफ है कि राहुल गांधी भी उन्हें आश्वस्त नही कर सके कि उनके साथ असम में जो कुछ अब तक हुआ है, वह आगे नहीं होगा। इसकी बड़ी वजह यह है कि राहुल गांधी को जमीनी बातों का पता नही रहता है, वह राज्य में किसी एक नेता की बात सुनते हैं और मानते हैं, वह जो कहे वही सही मानते हैं। असम में गोगोई परिवार ऐसा परिवार है जिसे गांधी परिवार अपना नजदीकी मानता है, वह मानता है कि वह जो असम के बारे में जो फैसला करेगा सही फैसला करेगा।

माना जाता है कि तरुण गोगोई के कारण ही हिमंता जैसे नेता को कांग्रेस छोड़ना पड़ा था क्योंकि उनको लगा कि गोगोई के रहते कांग्रेस का भला नहीं हो सकता और उनका भी भला नही हो सकता। अब माना जा रहा है कि गोगोई से कई मामलो में मतभेद के चलते भूपेन बोरा को भी यही एहसास हुआ कि गोगोई के रहते असम में कांग्रेस का भला नहीं हो सकता और उनका भी भला नहीं हो सकता इसलिए भूपेन ने हिमंता के जरिए भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है।हिमंता जानते हैंं असम की राजनीति में उनके लिए भूपेन बोरा कितने उपयोगी हैं। वह जानते है कि भूपेन बोरा के भाजपा में शामिल होने से भाजपा तो जमीनी स्तर पर मजबूत होगी और कांग्रेस जमीनी स्तर कमजोर होगी। इसका परिणाम क्या होना है वही होना है जो हिमंता के भाजपा में शामिल होने से हुआ था,कांग्रेस की हार और हर चुनाव मे हार। क्योंकि भूपेन के भाजपा मे शामिल होने का मतलब है कि और भी अच्छे कांग्रेस नेताओं के लिए द्वार खुल जाएंगे यानी चुनाव के पहले और भी कांग्रेस नेता भाजपा में शामिल हो सकते है।

कौन नहीं जानता है कि असम मेें कांग्रेस की तुलना में भाजपा कमजोर राजनीतिक पार्टी थी। वह वहां चुनाव जीतकर सरकार बना नहीं सकती थी। कांग्रेस के एक नेता के भाजपा में जाने से कांग्रेस असम में इतनी कमजोर हो गई कि वह एक नहीं दो चुनाव लगातार हार गई है और माना जा रहा है कि इस चुनाव के पहले भूपेन बोरा कांग्रेस छोड़ने से कांग्रेस असम में और कमजोर होने वाली है और तीसरी बार चुनाव हारने वाली हैं। राहुल गांधी की तुलना में हिमंता सरमा ज्यादा अच्छे से जानते हैं कि कांग्रेस को कैसे कमजोर कर असम में चुनाव जीता जा सकता है। वह यही कर रहे है और राहुल गांधी अपने वफादार नेता परिवार की परवाह जमीन से जुड़े नेताओं की तुलना ज्यादा करके चुनाव हार रहे हैं। देश में भी हार रहे हैं और राज्यों में भी हार रहे हैं।

असम की राजनीति में भूपेन बोरा का क्या महत्व है, यह हिमंता सरमा जानते हैं क्योंकि वह भी बरसों कांग्रेस में रहे हैं। यह वजह है कि भूपेश बोरा के इस्तीफा देने के बाद खुद सीएम होने के बाद भी हिमंता सरमा बोरा से मिलने गए उनके घर गए।उनको वह सम्मान दिया जो सम्मान वह कांग्रेस नेताओं से चाहते थे। कांग्रेस नेताओं ने उनको रोकने की कोशिश की लेकिन वह समझ गए कि अमस में गोगोई परिवार के रहते उनको वह सम्मान नहीं मिल सकता क्योंकि एक राजनीतिक परिवार दूसरे राजनीतिक परिवार को ज्यादा पसंद करता है,जमीन से जुड़े नेताओं की तुलना में। भाजपा में जमीन से जुड़े हिमंता सरमा को कुछ समय बाद वह सम्मान मिला जो कांग्रेस ने नहीं दिया इसलिए भूपेन आश्वस्त रह सकते हैं कि भाजपा में उनकोे वह सममान मिलेगा जो कांग्रेस में नहीं मिला।

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