दिल्ली विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध छात्र-विरोधी : एनएसयूआई

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर के भीतर विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने की निंदा की। संगठन ने इसे देशभर के वंचित एवं सामाजिक रूप से जागरूक छात्रों की आवाज दबाने का तानाशाही कदम बताया है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति जारी कर इसे लोकतांत्रिक भावना को कुचलने और सामाजिक न्याय तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विनियमों के न्यायपूर्ण क्रियान्वयन की मांग कर रहे छात्रों की आवाज दबाने का सुनियोजित प्रयास बताया।
उन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध आज शैक्षणिक संस्थानों को नियंत्रित कर रही “खतरनाक मानसिकता” को उजागर करता है। किसी और संगठन को प्रदर्शन करने की अनुमति दी जाती है और प्रशासन के निर्णयों का विरोध करने वाले छात्र संगठनों पर प्रतिबंधात्मक और दमनकारी आदेश थोप दिए जाते हैं। चौधरी ने कहा कि जब भी छात्र आरक्षण, समानता और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर प्रशासन से सवाल करते हैं, तो उन्हें भयभीत किया जाता है। यह छात्र शक्ति के प्रति डर और सत्ताधारी व्यवस्था की असुरक्षा को दर्शाता है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों में हो रहे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भेदभाव के विरुद्ध नियमों की मांग अब देशव्यापी छात्र आंदोलन का रूप ले रही है, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन असहज हो गया है। एनएसयूआई ने यह भी आरोप लगाया कि यह प्रतिबंध उस व्यापक एजेंडे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्र विचारों को नियंत्रित करना, सार्वजनिक संस्थानों को कमजोर करना और असहमति की हर आवाज को दबाना है। चौधरी ने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार प्रदान करता है। कोई भी प्रशासनिक आदेश हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकता।

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